जम्मू-कश्मीर में आधुनिक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में भारतीय रेलवे एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। कश्मीर घाटी तक वंदे भारत ट्रेन की सफल पहुंच के बाद अब रेल मंत्रालय ने अमृतसर से जम्मू के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस परियोजना के तहत भविष्य में बुलेट ट्रेन संचालन की योजना है, जो क्षेत्र के परिवहन ढांचे को पूरी तरह बदल सकती है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन द्वारा अमृतसर-जम्मू रूट पर नए ट्रैक के निर्माण के लिए जल्द ही अंतिम सर्वे शुरू किया जाएगा। यह सर्वे अत्याधुनिक लिडार (LiDAR) तकनीक के जरिए किया जाएगा, जो पहले दिल्ली-अमृतसर हाई-स्पीड कॉरिडोर के सर्वे का विस्तार माना जा रहा है। प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई लगभग 240 किलोमीटर होगी, जिसे खास तौर पर हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए डिजाइन किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद अमृतसर और जम्मू के बीच यात्रा का समय वर्तमान चार से पांच घंटे से घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा। ट्रैक को इस तरह विकसित किया जाएगा कि उस पर ट्रेनें अधिकतम 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुरूप चल सकें, जबकि वास्तविक परिचालन गति 250 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की संभावना है। अंतिम सर्वेक्षण के दौरान हवाई सर्वे, ड्रोन मैपिंग और लिडार तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे रूट की भौगोलिक परिस्थितियों, संभावित पुलों और सुरंगों की आवश्यकता, तथा पर्यावरणीय प्रभावों का सटीक आकलन संभव हो सकेगा। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और सटीकता दोनों सुनिश्चित होंगी।

इस कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल यात्रियों के समय की बड़ी बचत होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्राओं को भी नई गति मिलेगी। विशेष रूप से, दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु एक ही दिन में यात्रा पूरी कर वापस लौट सकेंगे, जो इस परियोजना की उपयोगिता को और बढ़ाता है। देश में बुलेट ट्रेन सेवा की शुरुआत के संदर्भ में, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर पहली बुलेट ट्रेन के अगले वर्ष अगस्त तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसी दिशा में अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर को भी एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है लिडार (LiDAR) तकनीक?
लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) एक उन्नत लेजर-आधारित सर्वेक्षण तकनीक है, जिसका उपयोग जमीन, वनस्पति और इंफ्रास्ट्रक्चर की अत्यंत सटीक 3-डी मैपिंग के लिए किया जाता है। इसमें तेज गति से लेजर पल्स भेजे जाते हैं, जो सतह से टकराकर वापस आते हैं और दूरी का सटीक मापन करते हैं। इस प्रक्रिया से लाखों बिंदुओं का एक घना समूह तैयार होता है, जिसे “प्वाइंट क्लाउड” कहा जाता है। लिडार तकनीक की खासियत यह है कि यह किसी भी प्रकाश स्थिति में प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और घने पेड़-पौधों के बीच से भी डेटा एकत्र करने में सक्षम होती है। यही कारण है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में इसे बेहद उपयोगी और विश्वसनीय माना जाता है।





