डिमेंशिया: कम उम्र में बढ़ती भूलने की समस्या, बदलती जीवनशैली बनी वजह

आमतौर पर भूलने की बीमारी को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब यह समस्या युवाओं में भी तेजी से पैर पसार रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, भागदौड़ भरी दिनचर्या और असंतुलित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं। आज के समय में युवाओं के बीच छोटी-छोटी बातें भूल जाना आम होता जा रहा है, जैसे बाजार जाकर जरूरी सामान भूल आना, लंबे समय बाद किसी परिचित का नाम याद न आना, या कमरे में आने का उद्देश्य ही भूल जाना। पहले यह समस्याएं बुजुर्गों में अधिक देखी जाती थीं, लेकिन अब युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं रहा।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आजकल हर तीसरा युवा भूलने की शिकायत लेकर पहुंच रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि युवाओं में यह समस्या मुख्य रूप से अत्यधिक तनाव, मल्टीटास्किंग और मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कारण हो रही है। पोषणयुक्त आहार की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन पर बिताया गया समय मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह हर मामला डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है।

दिमाग की कार्यप्रणाली को समझना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, याददाश्त कई प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है, जैसे ध्यान, एकाग्रता, रजिस्ट्रेशन और शॉर्ट व लॉन्ग टर्म मेमोरी। सामान्य रूप से दिमाग एक समय में सीमित सूचनाएं ही ग्रहण कर सकता है। यदि व्यक्ति एक साथ कई काम करता है या काम के दौरान ध्यान भटकता है, तो जानकारी सही तरीके से मस्तिष्क में दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में भूलने की स्थिति पैदा होती है। वहीं, अवसाद और तनाव के कारण एकाग्रता कम हो जाती है, जिससे दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

जीवनशैली से जुड़ी बड़ी वजहें

विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं में बढ़ती भूलने की समस्या के पीछे कई जीवनशैली संबंधी कारण हैं, जैसे—

  • देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना
  • असंतुलित खानपान और पोषण की कमी
  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी
  • नशे की आदत
  • मानसिक तनाव और चिंता

कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल या अन्य चिकित्सकीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में मनोवैज्ञानिक और जीवनशैली से जुड़े कारक ही प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

युवाओं के अनुभव भी चिंताजनक

कई युवा इस समस्या से जूझ रहे हैं। एक निजी कंपनी में कार्यरत युवक का कहना है कि रात की शिफ्ट के दौरान उसे दिए गए काम याद नहीं रहते, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहता है। वहीं, एक छात्रा बताती है कि पूरी तैयारी होने के बावजूद परीक्षा के दौरान उसे जवाब याद नहीं आते, जबकि बाद में सब कुछ याद आ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूलने की समस्या बार-बार हो रही है और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। सही समय पर परामर्श और जीवनशैली में सुधार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

  • जीवनशैली में संतुलन लाएं और नियमित दिनचर्या अपनाएं
  • एक समय में एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करें
  • तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग करें
  • मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग सीमित रखें
  • संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें
  • पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें
  • लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लें

कम उम्र में बढ़ती भूलने की समस्या एक चेतावनी है कि हमें अपनी जीवनशैली पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। समय रहते किए गए सुधार न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएंगे, बल्कि भविष्य में गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करेंगे।

डिस्क्लैमर: इस लेख का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना है, किसी भी प्रकार की दवा या उपचार से पहले डॉक्टर की अवश्य सलाह लें।

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