राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित और नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। करीब पांच महीने तक निलंबित रहने के बाद विभाग ने 15 मई से ई-रिक्शा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। इसके साथ ही कुछ नई और सख्त शर्तें भी लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य अनधिकृत ई-रिक्शा पर लगाम लगाना और शहर में उनकी बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना है।

नई पात्रता शर्तें: स्वामित्व नियमों में बड़ा बदलाव
पंजीकरण प्रक्रिया के साथ परिवहन विभाग ने स्वामित्व संबंधी नियमों में अहम संशोधन किए हैं। अब “एक लाइसेंस, एक वाहन” का सिद्धांत लागू होगा। यानी एक ड्राइविंग लाइसेंस पर केवल एक ही ई-रिक्शा पंजीकृत किया जा सकेगा। पहले एक ही व्यक्ति के नाम पर कई ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हो जाते थे, जिससे स्वामित्व कुछ लोगों तक सीमित हो रहा था और अवैध संचालन को बढ़ावा मिल रहा था। इसके अलावा, कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर ई-रिक्शा और ई-कार्ट के पंजीकरण पर भी रोक लगा दी गई है। विभाग ने पहले जारी उस सर्कुलर को वापस ले लिया है, जिसमें कंपनियों को एक ही इकाई के नाम पर कई वाहन रजिस्टर करने की अनुमति थी। इस फैसले का उद्देश्य बड़े ऑपरेटरों के एकाधिकार को खत्म करना और व्यक्तिगत ड्राइवरों को स्वरोजगार के अधिक अवसर प्रदान करना है।
प्रशिक्षण अनिवार्य: सुरक्षा और नियमों पर जोर
नई व्यवस्था में प्रशिक्षण को भी अनिवार्य कर दिया गया है। अब पंजीकरण के इच्छुक आवेदकों को दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना होगा। इस प्रशिक्षण के बाद मिलने वाला प्रमाण पत्र (ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) पंजीकरण के लिए अनिवार्य दस्तावेज होगा। बिना वैध प्रमाण पत्र के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कदम सड़क सुरक्षा बढ़ाने और चालकों को नियमों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ऑनलाइन प्रक्रिया से होगी सुविधा
पंजीकरण को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके लिए एक समर्पित लिंक उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके माध्यम से आवेदक आसानी से आवेदन कर सकेंगे। गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, ताकि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा के बेहतर प्रबंधन हेतु एक नया ढांचा तैयार किया जा सके।
सरकार का उद्देश्य: संतुलन और नियंत्रण
इन नए नियमों के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य ई-रिक्शा संचालन को सुव्यवस्थित करना है। एक वाहन को एक लाइसेंस धारक से जोड़ने से नियमों का उल्लंघन कम होगा और सड़कों से अवैध ई-रिक्शा हटाने में मदद मिलेगी। साथ ही, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यात्रियों को सुगम लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मिले और ड्राइवरों का रोजगार भी सुरक्षित रहे।
ड्राइवरों के लिए राहत, बड़े ऑपरेटरों पर अंकुश
नई व्यवस्था व्यक्तिगत ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत लेकर आई है, क्योंकि इससे बड़े ऑपरेटरों के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगेगी। अब छोटे और स्वतंत्र ड्राइवरों को अधिक अवसर मिलेंगे, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, 15 मई से लागू ये बदलाव राजधानी में ई-रिक्शा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और संतुलित बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में सरकार इस क्षेत्र के लिए व्यापक नीति और कड़े प्रवर्तन उपाय लागू करने की भी तैयारी कर रही है।







