पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक क्षेत्र में स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यालय और आसपास के इलाकों से 100 से अधिक आधार कार्ड मिलने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। पुलिस ने सभी बरामद कार्डों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, कोलकाता के बिधाननगर स्थित सॉल्ट लेक इलाके में चुनाव से पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं ने टीएमसी कार्यालय पर ताला जड़ दिया था। बीजेपी ने उस समय आरोप लगाया था कि कार्यालय के भीतर संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। हाल ही में जब यह ताला खोला गया, तो अंदर से बड़ी संख्या में आधार कार्ड बरामद हुए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों ने दावा किया है कि बरामद आधार कार्ड उन्हीं के हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आधार से जुड़े कार्यों के लिए टीएमसी कार्यालय का पता इस्तेमाल किया था और आवेदन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज वहीं जमा किए गए थे, जिसके चलते कार्ड वहीं रह गए। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। सॉल्ट लेक के बीए-सीए खेल मैदान के पास भी कई आधार कार्ड लावारिस हालत में पाए गए। सुबह टहलने निकले लोगों ने सबसे पहले इन कार्डों को देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इन आधार कार्डों पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों के पते दर्ज थे, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के पहचान पत्रों का इस प्रकार एक स्थान पर मिलना सामान्य नहीं है। प्रारंभिक जांच में अवैध जमीन की खरीद-बिक्री या किसी संगठित नेटवर्क की संलिप्तता की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये आधार कार्ड यहां तक कैसे पहुंचे और इसके पीछे किसका हाथ है।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की प्रक्रिया जारी है। विपक्ष इस मामले को मतदाता पहचान और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि टीएमसी ने इसे पूरी तरह से राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटों पर कब्जा जमाया है और पहली बार राज्य की सत्ता में आई है। ऐसे में यह मामला आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है।






