उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लखनऊ में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसलों पर मुहर लगी। इस बैठक में कुल 12 अहम प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें पंचायत चुनावों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन सबसे प्रमुख निर्णय के रूप में उभरकर सामने आया। इसके साथ ही लखनऊ मेट्रो विस्तार, स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और पशु चिकित्सा छात्रों के हित में लिए गए फैसलों को भी मंजूरी दी गई। सरकार के इन निर्णयों को आगामी चुनावी परिदृश्य और प्रदेश के बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन
कैबिनेट बैठक का सबसे चर्चित निर्णय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को लेकर लिया गया। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग पांच सदस्यों का होगा, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। आयोग का कार्यकाल छह महीने निर्धारित किया गया है। सरकार के अनुसार, यह आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की स्थिति का अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण की रूपरेखा तय की जाएगी। अनुमान है कि आयोग अपनी रिपोर्ट नवंबर 2026 तक सौंप सकता है। ऐसे में पंचायत चुनावों के विधानसभा चुनाव 2027 के बाद आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 4 फरवरी 2025 को सरकार को इस संबंध में आयोग गठन के निर्देश दिए थे।

वेटनरी छात्रों को बड़ी राहत
कैबिनेट ने पशु चिकित्सा के छात्रों को भी बड़ी राहत दी है। बीवीएससी एंड एएच (बैचलर ऑफ वेटनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री) के छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के विभिन्न वेटनरी कॉलेजों में हर वर्ष लगभग 2,000 से 2,500 छात्रों का प्रवेश होता है, जबकि वर्तमान में 10,000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इस निर्णय से छात्रों को आर्थिक संबल मिलेगा और उनकी पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण को मजबूती मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े फैसले: कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास को गति देने के लिए कई अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई—

- लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंतकुंज कॉरिडोर के लिए एमओयू को हरी झंडी दी गई, जिससे शहर में यातायात व्यवस्था और बेहतर होगी।
- प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के विस्तार हेतु जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
- आगरा मेट्रो रेल परियोजना के तहत कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) के लिए मेट्रो स्टेशन और वायाडक्ट निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है।
- मिर्जापुर में 2800 करोड़ रुपये की लागत से बड़ा बिजली उपकेंद्र और नई विद्युत लाइनें स्थापित की जाएंगी, जिससे घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
- लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 1010 बेड का आधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी इमरजेंसी अस्पताल, टीचिंग ब्लॉक और नया ओपीडी ब्लॉक बनाया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 855 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
विकास और चुनावी रणनीति का संतुलन
कैबिनेट के इन फैसलों को जहां एक ओर विकास परियोजनाओं को गति देने वाला माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं। सामाजिक संतुलन, बुनियादी ढांचे का विस्तार और युवाओं को राहत देने जैसे कदम सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं।







