अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; बिना नंबर प्लेट वाहनों को नहीं मिलेगा ईंधन

चंबल सेंक्चुअरी में जारी अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट वाले वाहनों को अब पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त करने के बाद केवल जुर्माना भरकर छोड़ने की व्यवस्था पर भी रोक लगाने की दिशा में सख्ती दिखाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने हलफनामा पेश कर बताया कि खनन में उपयोग किए जा रहे वाहनों को परिवहन विभाग द्वारा जब्त किए जाने पर उन्हें आसानी से छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही सेंक्चुअरी के आसपास स्थित सभी पेट्रोल पंपों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना वैध रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराएं। इस मामले में अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित है, जिसमें कोर्ट अपना निर्णय सुना सकता है। बुधवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अवैध खनन में शामिल माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब तक 625 प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अधिकारी इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं की पहचान करने में विफल रहे हैं। पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि सैकड़ों गिरफ्तारियों के बावजूद असली मास्टरमाइंड तक न पहुंच पाना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। न्यायमूर्ति मेहता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छोटे स्तर के आरोपियों के बजाय इस अवैध खनन नेटवर्क के मुख्य संचालकों को पकड़ने पर ध्यान केंद्रित करें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि सेंक्चुअरी के आसपास बसे गांवों के लोगों को वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे मजबूरी में अवैध खनन गतिविधियों का हिस्सा न बनें। इसके लिए राज्य सरकार को एक ठोस और प्रभावी नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के सदस्य सीपी गोयल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में वन विभाग में विशेषकर फॉरेस्ट गार्ड की भारी कमी का उल्लेख किया गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए भर्ती प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। करीब 5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली चंबल सेंक्चुअरी, जो उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विस्तारित है, वहां वर्तमान में आधे से भी कम कर्मचारी तैनात हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सीमा में 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी एक ही फॉरेस्ट गार्ड के जिम्मे है। कोर्ट ने लंबित भर्तियों (बैकलॉग) पर भी चिंता जताई और कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से शीघ्र भर्ती सुनिश्चित करने को कहा।

निगरानी के लिए 65.47 करोड़ रुपये का प्रावधान
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को अवगत कराया कि सेंक्चुअरी में निगरानी को मजबूत करने के लिए चार स्थायी और सात अस्थायी चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा, एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और ‘अभय कमांड सेंटर’ के निर्माण के लिए 65.47 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। सेंक्चुअरी क्षेत्र में 40 अति संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है, जहां आधुनिक निगरानी उपकरण लगाए जाएंगे। साथ ही अवैध खनन में लगे वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। धौलपुर जिले में इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा चुका है, जबकि अन्य जिलों में इसे 31 जुलाई तक पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के इन सख्त निर्देशों से चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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