संसदीय कमेटी के सामने एनटीए ने कहा ‘नीट का पेपर लीक नहीं हुआ’

नीट पेपर लीक 2026 मामले को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है, जिसने पूरे देश में चर्चा तेज कर दी है। संसद की एक महत्वपूर्ण समिति के समक्ष राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया, जहां उनसे कथित पेपर लीक को लेकर कई सवाल पूछे गए। हालांकि, अधिकारियों ने साफ तौर पर पेपर लीक होने से इनकार किया और कहा कि अभी इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है। उनका कहना था कि यदि सीबीआई अपनी जांच में पेपर लीक की पुष्टि करती है, तभी इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाएगा।

समिति की अध्यक्षता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कर रहे थे। इस बैठक में एनटीए के चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी और डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह उपस्थित थे। विपक्षी सांसदों ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए, लेकिन अधिकारियों के पास कई सवालों के स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं थे। डीजी अभिषेक सिंह ने दो टूक कहा कि एनटीए के सिस्टम से किसी प्रकार का पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पेपर लीक की पुष्टि केवल सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकती है। समिति ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि यदि पेपर लीक नहीं हुआ था, तो परीक्षा को रद्द क्यों किया गया और दोबारा आयोजित करने का निर्णय क्यों लिया गया? इस अहम सवाल पर अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं, और छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए परीक्षा को दोबारा आयोजित करना जरूरी समझा गया। एनटीए ने यह भी स्वीकार किया कि परीक्षा के दौरान कुछ प्रश्न बाहर जरूर आए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा पेपर लीक हो गया था। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि अभी तक पेपर लीक होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।

अगर पूरे मामले की बात करें तो नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर एक पीडीएफ वायरल हुई, जिसके आधार पर पेपर लीक होने के आरोप लगे। इसके बाद बढ़ते विवाद और दबाव के चलते एनटीए ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने जांच शुरू की, जिसमें राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक फैले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच में यह सामने आया कि कथित पेपर हाथ से लिखकर तैयार किया गया था। आरोप है कि राजस्थान के एक अभ्यर्थी के पिता दिनेश बिवाल ने इसे स्कैन कर पीडीएफ बनाई और कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए छात्रों से 2 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले गए।

इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। गिरफ्तार लोगों में बॉटनी की शिक्षिका मनीषा मांधरे, कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर समेत कई अन्य आरोपी शामिल हैं। शुरुआती जांच में यह नेटवर्क राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल तक फैला हुआ पाया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीट यूजी 2026 की परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी। वहीं, पूरे देश की नजर अब सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस मामले की सच्चाई को पूरी तरह सामने लाएगी।

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