राजस्थान: आईएसआई के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में युवक गिरफ्तार

जैसलमेर में बॉर्डर पर दुकान खोलकर कर रहा था जासूसी; कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

राजस्थान के जैसलमेर जिले से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। राजस्थान सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने एक विशेष अभियान चलाते हुए सीमावर्ती क्षेत्र नाचना से एक युवक को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित रूप से जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और वीडियो पाकिस्तान भेजने का आरोप है। इस मामले में शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट) के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार युवक की पहचान नाचना थाना क्षेत्र के खारिया गांव स्थित हिगोला की ढाणी निवासी मुस्ताक अली पुत्र नबी बख्श के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पिछले लगभग दो वर्षों से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था और नियमित रूप से संवेदनशील सूचनाएं साझा कर रहा था। सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने आरोपी से गहन पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे 22 जून तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं और इसी दौरान आरोपी उनकी निगरानी में आया।

लंबे समय से एजेंसियों के रडार पर था
सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान इंटेलिजेंस राज्यभर में पाकिस्तान समर्थित गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों की लगातार निगरानी कर रही थी। तकनीकी निगरानी, सोशल मीडिया गतिविधियों और खुफिया इनपुट के आधार पर मुस्ताक अली की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जयपुर स्थित पूछताछ केंद्र में लाया गया, जहां केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से पूछताछ की। उसके मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्य मामले को और गंभीर बनाते हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया था। उसे विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और वह नियमित रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता था। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जासूसी गतिविधियों के प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी को सीमा क्षेत्र की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग पर दुकान खोलने के लिए प्रेरित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस दुकान का उपयोग केवल व्यापार के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि वह बीएसएफ और सेना की आवाजाही, सैन्य वाहनों की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारियां एकत्र कर आगे भेजता था। पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी सीमा क्षेत्र में होने वाली सैन्य गतिविधियों के वीडियो और तस्वीरें बनाकर पाकिस्तान भेजता था। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक कितनी सूचनाएं साझा की गईं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आर्थिक लाभ के लालच में इस गतिविधि में शामिल हुआ था। जांच में धन के लेन-देन के कुछ संकेत मिले हैं, हालांकि पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है। आशंका जताई जा रही है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी एजेंसियां आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाती हैं।

ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
सीआईडी इंटेलिजेंस ने आरोपी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उसके डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है और उससे लगातार पूछताछ जारी है। अब सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। उसके मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया चैट, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। विशेषज्ञ इस गिरफ्तारी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सफलता मान रहे हैं। जैसलमेर, बाड़मेर सहित सीमावर्ती इलाकों में समय-समय पर जासूसी के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और सक्रियता का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। फिलहाल, मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

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