23 जून को होगी सुनवाई, जमीन से लेकर फंडिंग तक मांगा जवाब, ट्रस्ट के पंजीकरण पर खतरा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की परेशानियां एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। आयकर विभाग ने ट्रस्ट को आयकर अधिनियम की धारा 12AB और 12AA के तहत विस्तृत नोटिस जारी कर 23 जून को पेश होने के लिए कहा है। इस नोटिस में ट्रस्ट की गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और संचालन से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयकर विभाग ने सुनवाई की तारीख 23 जून सुबह 11:30 बजे तय की है और निर्देश दिया है कि ट्रस्ट की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो ट्रस्ट के पंजीकरण को रद्द करने पर विचार किया जा सकता है।

पंजीकरण पर खतरा
आयकर विभाग ने साफ किया है कि यदि ट्रस्ट संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो उसके पंजीकरण को रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में जौहर ट्रस्ट के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है।

37 पन्नों का विस्तृत नोटिस जारी
17 जून को जारी 37 पेज के नोटिस में विभाग ने कहा है कि ट्रस्ट की कुछ गतिविधियां उसके घोषित उद्देश्यों से मेल नहीं खातीं। नोटिस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2021 के फैसले का हवाला देते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े विवादों और कथित शर्तों के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। विभाग ने नोटिस में कहा है कि विश्वविद्यालय स्थापना के लिए निर्धारित सीमा से अधिक भूमि लेने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, लेकिन इन शर्तों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आयकर विभाग ने भूमि उपयोग, वार्षिक रिपोर्ट दाखिल करने और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में ट्रस्ट परिसर में मस्जिद निर्माण के मुद्दे को भी उठाया गया है। विभाग का कहना है कि इस मामले में ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों में विसंगतियां दिखाई देती हैं, जिन पर जवाब मांगा गया है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट के संचालन ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ जांच रिपोर्टों और बयानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कुछ ट्रस्टी “डमी” हो सकते हैं और ट्रस्ट का वास्तविक नियंत्रण आजम खान और उनके परिवार के हाथों में होने के आरोपों की जांच की जा रही है। नोटिस में निर्माण कार्यों, कथित अघोषित निवेश, सरकारी धन के उपयोग और फंड डायवर्जन जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट को अपने पक्ष के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।




