इंटरमिटेंट फास्टिंग…

उपवास तो लगभग हम सभी किसी न किसी दिन करते ही हैं। अलग अलग अवसरों पर, विभिन्न कारणों की वजह से, विभिन्न समय, और विभिन्न तरीको से। आप माने या न माने, लेकिन हम सब रोज उपवास रखते हैं। हम रोज रात को खाना खा कर सोते हैं, और 8 घंटो बाद जब हम उठते हैं, तब हमने 8 घंटो का उपवास कर लिया होता हैं, जिसे हम सुबह का नाश्ता खा कर तोड़ देते हैं। इस ही तरह से दुनिया के अलग अलग भागो में, अलग अलग जाति-धर्मो द्वारा कुछ अवसरों पर लोग उपवास करते हैं। जैसे हिन्दू लोगों में करवा-चौथ, मुस्लिमों में रमज़ान के अवसर पर पूरा दिन बिना पानी के रहना, जैन लोगों में संथारा में, जब ये लोग स्वेच्छा से अपनी जिंदगी का अंत करने की इच्छा से यह उपवास रखते हैं, सिख लोगों में हालांकि ऐसी कोई परंपरा नहीं देखी गई हैं। महात्मा गांधी ने भारत को स्वतंत्र बनाने के लिए उपवास को अपने अहिंसक हथियार के रूप में बड़ी ही होशियारी से इस्तेमाल किया था।

लेकिन आज के दौर में लोग उपवास को अलग ही कारण की वजह से अपना रहे हैं। जब लोगो को पतला होने की जरुरत होती हैं, तब वे उपवास रखते हैं।  हालांकि कुछ लोगो को लगता हैं की, कम खाना खाना, बहुत देर तक कुछ ना खाने से अच्छा हैं। और कुछ लोगो को तो ऐसा भी लगता हैं कि उपवास रखना जान के लिए हानिकारक हो सकता हैं, इससे मोटापा बढ़ता हैं, या फिर इससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती हैं। इसका असली जवाब तो किसी को अभी तक नहीं पता हैं। लेकिन आज आप एक नए तरीके के उपवास के बारे में जानने वाले हैं, जो आजकल बहुत सुनने में आता हैं। इसको कहते हैं “इंटरमिटेंट फास्टिंग”। यह एक ऐसा उपवास करने का तरीका हैं जिसे करने के अनेक तरीके हैं। पहले तरीके में आप 5 दिनों तक साधारण भोजन का सेवन करते हैं, और बाकी 2 दिनो में उपवास रखते हैं। यह तरीका उन लोगों के लिए हैं जिन्हे आम तौर पर उपवास कारण की पहले से आदत होती हैं। दूसरा तरीका यह हैं की, आप 24 घंटो के लिए अपने खाने का त्याग कर देते हैं, और यह हफ्ते में एक या फिर दो दिनों में आप कर सकते हैं। यह तरीका उन लोगों के लिये काम आएगा जिन्हे हफ्ते के 5-6 दिन काम की वजह से सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। और तीसरा तरीका हैं, आप अपने खाने का सेवन साधारण तरीके से करेंगे लेकिन एक ठराविक समय के अंदर। जैसे की खाना खाने के लिए ज्यादा से ज्यादा एक दिन में 6-8 घंटे लगने चाहिए और बचे हुए 14-16 घंटो के लिए आप अन्न त्यागते हैं। इसे आप हफ्ते में कई बार या फिर हर रोज करने की कोशिश कर सकते हैं। यह तरीका सबसे आसान हैं क्योंकि इन 14-16 घंटो में से 8 घंटे हमारे नींद लेने में ही निकल जाते हैं, और तैयार होने, या घूमने में 3 घंटे, जिसमे आपकी और कसरत हो जाती हैं।

यह उपवास का तरीका काम कैसे करता हैं, ये हमारे लिए क्यों फायदेमंद हैं? इसका जवाब हैं की जब हम कुछ गिने चुने समय के लिए कुछ नहीं खाते हैं, इससे हमारे शरीर और दिमाग का बहुत फायदा हैं। हमारे पूर्वजों से हमे यह चीज विरासत में मिली हैं की हम लोग कुछ न खा कर भी, कई दिनों के लिए जिन्दा रहने की सहनशीलता रखते हैं। हमारे पूर्वजों ने हमे यह अद्भुद शक्ति दी हैं, क्योंकि उन लोगो को कई दिनों तक खाना नहीं मिलता था, और खाने की तलाश में वह अनगिनत घंटो की कसरत (शिकार पर निकल जाते थे) में लगे रहते थे। आजकल हमें मांस या खाने की तलाश में नहीं भागना पड़ता, इसलिए हमारे शरीर को 24 घंटा खाना न मिलने की वजह से हमारे भूखे रहने की क्षमता बढ़ने के साथ साथ हमारा वजन कम होने की गति को जरूर बढ़ाता हैं, हमारी स्फूर्ति बढ़ाता हैं, हमारे शरीर की कोशिकाओं को ठीक करने और नई कोशिकाए बनाने को बढ़ावा देता हैं। हमारे शरीर के इन्सुलिन प्रतिरोध होने से बचाने के साथ साथ हमारे दिमाग की क्षमता, याद्दाश को तेज़ रखता हैं। शरीर के “बॉडी कोलेस्ट्रॉल” को कम करता हैं।

अगर आप इस तरीके के इंसान हैं जिसे उपवास करना बिलकुल भी पसंद नहीं हैं, या फिर उपवास सहन नहीं होता, तो आप “कीटो डाइट” अपना सकते हैं। लेकिन यह आहार हर किसी के लिए नहीं बना हैं, यह आहार सिर्फ और सिर्फ चिकित्सा या उपचार के समय ही अपनाएं। इसलिए जबकि ये आहार अत्त्यंत लाभकारी हैं, यह आहार सबके लिए नहीं बना हैं। यह एक अत्त्याधिक वसा वाला आहार होता हैं, और इसमें 70-80% वसा, 20% प्रोटीन और 5% कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। लेकिन आप इस कीटो आहार को क्यों अपनाए? यह आहार, हमारे शरीर में खाने को ऊर्जा में बदल कर रख देता हैं। बहुत ज्यादा वसा खाने से और कम कार्बोहाईड्रेड्स के सेवन करने की वजह से, शरीर कोन्सिस अवस्था में चला जाता हैं, जिसमे ऊर्जा स्त्रोत ग्लूकोस के बजाए कीटोन्स (वसा तैयार करने वाला तत्त्व) का इस्तेमाल करता हैं। यह कोई नयी तकनीक नहीं हे, यह वर्ष 1920 में शोधकर्ताओं ने पाया कि रक्त में कीटोन्स के स्तर में वृद्धि के कारण रोगियों में मिर्गी के दौरे कम होते हैं। कीटो आहार का उपयोग आज भी मिर्गी के शिकार बच्चों के इलाज के लिए किया जाता हैं, सभी फल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं, लेकिन आप कुछ फलों (आमतौर पर जामुन) को छोटे भागों में खा सकते हैं। सब्जियां (कार्बोहाइड्रेट में भी समृद्ध) पत्तेदार साग (जैसे पालक), फूलगोभी, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, शतावरी, मिर्च, प्याज, लहसुन, मशरूम, ककड़ी, अजवाइन तक सीमित हैं। अब इस आहार के फायदे हैं कि इस आहार से आपका वजन, भूख के हार्मोन घ्रेलिन को दबा देता हैं, जिससे आपको पेट भरे होने का एहसाह होता हैं। इस वजह से हमारी खाने की खपत कम होने लगती हैं और शरीर को वसा/मोटापे का इस्तेमाल करने में मजबूर करती हैं। वजन घटाने के संदर्भ में, आप केटोजेनिक आहार की कोशिश करने में दिलचस्पी ले सकते हैं क्योंकि आपने सुना हैं कि यह तुरंत प्रभाव डाल सकता हैं। और यह सच हैं, लेकिन याद रखे कि ज्यादातर शरीर का वजन अपने अंदर का पानी होता हैं। इस आहार के सेवन से शरीर पे किसी भी तरह की सूजन से छुटकारा मिलता हैं। कैटोन्स मस्तिष्क को तत्काल ऊर्जा भेजता हैं। इसी के साथ शरीर की ऊर्जा बढ़ाने और शरीर के ब्लड शुगर को कम करता हैं। आप अगर अपने चिकित्सा केंद्र में न दिखते हुए इसका उपयोग करते हैं तो आपके पोषक तत्वों की कमी से गुजरना पड सकता हैं। इसका गैर उपयोग करने से लिवर या किडनी में  तकलीफ शुरू हो सकती है। कीटो आहार में कम रेशेदार खाद्य पदार्थ जैसे अनाज और फलियां होते हैं जिस वजह से कब्ज की तकलीफ शुरू हो सकती हैं। हमारे दिमाग को चीनी की जरुरत होती हैं, यह आहार लेने से आपको भ्रम और चिड़चिड़ापन होने की आशंका हो सकती हैं। लेकिन अगर आप “टाइप-2 डायबिटीज” के मरीज हो, या आप मोटापे से मुक्ति पाना चाहते हो तो इस कीटो डाइट का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए, लेकिन अगर आप उम्र में छोटे हो तो इसका उपयोग न करे। अगर आप इसका उपयोग करना चाहते हो तो हमेशा ताज़ी और अच्छी-खासी गैर स्टार्च की सब्जियों का सेवन करें। हर किसी के शरीर पर इसका असर अलग अलग होता हैं, तो अगर आपको इस आहार की शुरुआत करनी हैं तो आप को अपने नज़दीकी चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। आप क्या और कैसा खाते हैं इस पर आपकी सेहत टिकी हुई है।

विशिखा मीडिया

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