भारत के पड़ोसी देश चीन के कई डिप्लोमैट्स ने दिसंबर 2023 में नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय का दौरा किया था। इस दौरे को लेकर अब कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल उठाते हुए कहा कि चीन के डिप्लोमैट्स आरएसएस मुख्यालय क्यों गए तथा वहां क्या बातचीत हुई? खरगे ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार के विदेश मंत्रालय ने पहली बार माना कि चीन के साथ रिश्ते ठीक नहीं हैं। दूसरी तरफ खबरों के माध्यम से सामने आया कि चीन के कुछ डिप्लोमैट्स आरएसएस के मुख्यालय गए। खरगे ने आगे कहा कि चीनी प्रोफेशनल्स एवं टेक्नीशियन को मोदी सरकार ने वीज़ा में छूट क्यों दी है? जबकि चीन ने हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को एशियन गेम्स के लिए वीज़ा नहीं दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या 2020 में चीन से लड़ाई लड़ते हुए हमारे 20 वीर जांबाजों ने गलवान में अपने प्राणों की आहुति नहीं दी थी? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को तय कर लेना चाहिए उनकी चीन के लिए क्या नीति है। खरगे ने कहा कि पूरा देश इन सवालों के जवाब जानना चाहता है। कांग्रेस ने इस मीटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार चीनी संकट से निपटने के लिए उपयुक्त नहीं है, विदेश मंत्री का मानना है, कि चीन इतना बड़ा है कि उससे सीधे तौर पर मुकाबला नहीं किया जा सकता। इन सबके बीच आरएसएस गर्मजोशी से उनका स्वागत कर रहा है और उनकी मेहमान-नवाजी कर रहा है।
आपको बता दें कि दिसंबर महीने में चीनी राजनयिकों के एक समूह ने पहले सप्ताह में आरएसएस स्मृति मंदिर परिसर का दौरा किया था। चीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का वैचारिक विरोधी है। हालांकि इस दौरे के दौरान चाइनीज डिप्लोमैट्स आरएएस प्रमुख मोहन भागवत से नहीं मिल पाए थे।





