संसद की सुरक्षा में सेंध कांड में आरोपियों का नार्को टेस्ट

संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी पर सुरक्षा में सेंध लगाकर अफरा-तफरी फैलाने वाले पांच आरोपियों का गुजरात में नार्को टेस्ट किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें अहमदाबाद लेकर गई है। संसद सुरक्षा चूक मामले में 6 में से पांच आरोपियों को पॉलीग्राफ और नार्को-एनालिसिस परीक्षण अभी चल रहा है। स्पेशल सेल की टीम अभी गुजरात के अहमदाबाद में मौजूद है। उम्मीद की जा रही है कि शुक्रवार तक सभी टेस्ट पूरा हो पाएंगे। पांच आरोपियों में सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल शिंदे, ललित झा और महेश कुमावत शामिल हैं। सभी पांच आरोपियों की पॉलीग्राफ जांच होगी। वहीं सागर और मनोरंजन को नार्को-एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग परीक्षणों से भी गुजरना होगा। इस केस में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था जिसमें से 5 आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट हो रहा है। जबकि एक आरोपी नीलम आजाद का ये टेस्ट नहीं हो रहा है, क्योंकि उसने इसके लिए हामी नहीं भरी थी। इन 6 आरोपियों की पुलिस कस्टडी 5 जनवरी को खत्म हो गई थी। इसके बाद इन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया जहां पर पॉलीग्राफ टेस्ट की सुनवाई हुई। इस दौरान इन सभी की पुलिस हिरासत को 8 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया था। इस मामले में सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल शिंदे, नीलम आजाद, विशाल शर्मा और ललित झा को आरोपी बनाया गया है। लोकसभा चैम्बर में कूदने वालों में सागर शर्मा और मनोरंजन डी. शामिल थे। शून्यकाल के दौरान ये लोग कूदे थे। इन्होंने पीले रंग का धुआं छोड़कर नारेबाजी की थी। उसी समय सागर और मनोरंजन लोकसभा के अंदर हंगामा कर रहे थे। संसद भवन के बाहर अमोल शिंदे और नीलम देवी ने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाकर वही पीले रंग का धुआं छोड़ा। जिस वक्त नीलम और अमोल पीले रंग का स्प्रे रहे थे,

वर्ष 2022 में ललित, सागर और मनोरंजन ने मैसूर में मुलाकात की थी। इस दौरान इन तीनों ने संसद में घुसपैठ का प्लान बनाया। इसके बाद इसमें नीलम और अमोल भी शामिल हो गए। ललित झा एक टीचर है। वही इस साजिश का मास्टरमाइंड भी है। उसके निर्देश पर ही मनोरंजन ने इस साल जुलाई में संसद भवन की रेकी की थी। अब तक की जांच में सामने आया है कि जुलाई में जब मॉनसून सत्र चल रहा था, तब मनोरंजन विजिटर पास बनवाकर संसद के अंदर गया था। यहां उसे पता चला कि विजिटर के जूतों की चेकिंग नहीं की जाती है। इसलिए वो लोग जूते में स्प्रे छुपाकर लाए थे।

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