भारत की आयुर्वेदिक पारंपरिक चिकित्सा लगभग 3000 वर्षों से प्रचलन में है और लाखों भारतीयों की स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत को पूरा कर रही है। आयुर्वेद शब्द की उत्पत्ति आयु और वेद से हुई है। आयु का अर्थ है जीवन, वेद का अर्थ है विज्ञान या ज्ञान अर्थात आयुर्वेद का अर्थ है जीवन का विज्ञान। आयुर्वेद सभी जीवित चीजों मानव और गैर मानव हेतु लाभकारी है यह तीन मुख्य शाखों में विभाजित है पहला मानव जीवन से संबंधित दूसरा पशु जीवन और उसके रोगों से निपटना और तीसरा है पौधे के जीवन और उसके विकास और रोगों से निपटना। आयुर्वेद न केवल चिकित्सा की एक प्रणाली है बल्कि पूर्ण सकारात्मक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्राप्ति के लिए जीवन का एक तरीका भी है। भारतीय चिकित्सा में आयुर्वेद प्रयुक्त योग्यता स्थापित करती है और आयुर्वेद यूनानी तथा सिद्ध साहित्य पारंपरिक अभ्यास के विभिन्न रूपों को मान्यता देती है। आयुर्वेद में निवारक और उपचारात्मक दोनों पहलू हैं। निवारक घटक व्यक्तिगत और सामाजिक इच्छा के सख्त सहिंता की आवश्यकता पर जोर देता है। जिसका विवरण व्यक्तिगत जलवायु और पर्यावरण या आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। आयुर्वेद के उपचार आत्मक पहलुओं में हर्बल औषधीय बाहर तैयारी फिजियोथैरेपी और आहार का उपयोग शामिल है। यह आयुर्वेद का एक सिद्धांत है कि प्रत्येक रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए निवारक और चिकित्सा उपाय को अनुकूलित किया जाना चाहिए।
भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लाभ
यदि हम इसके लाभ की बात करें तो आयुर्वेद में यह माना जाता है कि जीवित मनुष्य तीन हास्य, पित्त और कफ के साथ मूल उत्तकों, रस रक्त मनसा मेड अस्थि मज्जा और शुक्राणु और शरीर के अपशिष्ट उक्त पद अर्थात मल मूत्र और श्वेत का समूह है। इस शरीर मैट्रिक्स तथा उसके घटकों की वृद्धि एवं विषय इन तत्वों के मनोवैज्ञानिक तंत्र पर केंद्रित होते हैं और इसका संतुलन ही किसी के स्वास्थ्य की स्थिति का मुख्य कारण होता है। आयुर्वेद प्रणाली में उपचार का दृष्टिकोण समग्र और व्यक्तिगत है जिसमें नवारक उपचार आत्मक सामान उपचारात्मक तथा पुनर्वास संबंधी पहलू है। आयुर्वेद के मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य को बनाए रखना और बीमारी की रोकथाम और बीमारी का इलाज करना है।
आयुर्वेद हमारी आदतें और स्वास्थ्य के मध्य संबंध स्थापित करता है प्राचीन ग्रंथो के अनुसार विवेकशील व्यक्ति प्राकृतिक पदार्थ का सेवन करता है जिसमें दवाइयां और जड़ी बूटी शामिल है। यह आपको चिंता मुक्त खुश स्वस्थ और रोग मुक्त रखते हैं। आयुर्वेद हमें अच्छे जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं के बारे में जानकारी देता है इसके अंतर्गत अन्य ज्ञान एवं योग आता है। आयुर्वेद की मदद से बहुत सी बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है साथ ही हंसी व खुशी के साथ जीवन यापन करने में सफलता भी मिलती है। हर रोग की जड़ वर्तमान आधुनिक जीवन शैली में आए बदलाव हैं और स्वास्थ्य आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है इस बदलाव को ठीक करने के लिए आयुर्वेद अत्यंत लाभकारी है।
आयुर्वेद इस बात पर बल देता है कि आप स्वयं से प्रेम करें किसी अन्य व्यक्ति से अपनी तुलना ना करें आप अपनी भौतिक आवश्यकताओं को ध्यान रखें जो आपके जीवन का विकास करने एवं अच्छा स्वास्थ्य देने में लाभकारी है। आयुर्वेद मूलतः प्रकृति के पास ले जाता है वातावरण का संतुलन न होने पर स्वास्थ्य बिगड़ सकता है पर आयुर्वेद आपको प्रकृति से जोड़कर आपका स्वास्थ्य को ठीक करने में आपकी मदद करता है। आजकल के दैनिक जीवन में हमें अपनी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है मानव हमेशा से धैरहीन रहा है इसलिए हमें यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ऊर्जा हमारे जीवन में क्या महत्व रख रही है साथ ही हमारे जीवन में किस कार्य का क्या महत्व है इस पर भी हमें सोच विचार करना चाहिए इस पर आयुर्वेद आपको अपने आप को खोजने में और निखारने में मदद कर सकता है।
अनुसंधान या सिद्ध करते हैं क्या आयुर्वेद हमारी कोशिकाओं पर भी महत्वपूर्ण कार्य करता है आयुर्वेद में शक्ति होती है जो हमारी कोशिकाओं को सुचारू बनता है इससे हमारे कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी बढ़ती है इसके अलावा अपच भोजन हमारे शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है यदि यह माल समय पर साफ ना किया गया तो शरीर में एकत्रित होकर संतुलन की स्थिति बनता है आयुर्वेद व इसके औषधीय के द्वारा इस अपच भोजन व मल को भी निकलने में मदद मिलती है जिससे हमारा शरीर पूरी तरह से साफ होता है।
आयुर्वेद पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी काफी उपयोगी है। कई देशों के अनुसार भोजन ग्रहण करने से आपका पाचन तंत्र मजबूत होता है कुछ भोजन पदार्थ का सेवन करने से पाचन तंत्र सही समय पर सक्रिय होता है साथ ही शरीर में बनने वाले विषैले तत्व की समाप्ति भी होती है। इसके अलावा योग और आयुर्वेदिक औषधियां का उपयोग कर आप तनाव को भी काम कर सकते हैं और अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं। खाना खाने से व्यक्ति में एक संतुष्टि का भाव आता है। यदि आपका पाचन तंत्र अच्छा नहीं है तो आप आशाए और थका हुआ महसूस करेंगे जो कि आपके जीवन में नकारात्मकता की भावना प्रेषित करेगा। आयुर्वेद आपको मानसिक रोगों से भी मुक्ति दिलाता है। आजकल के जीवन में हर एक मनुष्य कई तनावों से गुजर रहा होता है अत्यधिक गुस्सा करना चिड़चिड़ापन एवं कई प्रकार की मानसिक बीमारियों से भी आए दिन लोग गुजरते हैं लेकिन यदि आप आयुर्वेद उसकी औषधीय व योग का इस्तेमाल करेंगे तो इन मानसिक बीमारियों और मानसिक तनाव से आपको मुक्ति मिल सकती है।
आयुर्वेद के सिद्धांत
वहीं यदि आयुर्वेद के सिद्धांतों की बात करें तो आयुर्वेद के छह मूल सिद्धांत हैं। आयुर्वेदिक संपूर्ण चिकित्सा प्रणाली है जिनका मानना है कि अंततः सभी बुद्धि और विवेक एक ही पूर्ण स्रोत से प्रवाहित होते हैं स्वास्थ्य प्रकृति के नियमों के माध्यम से कार्य करते हुए पूर्ण की कृपा से प्रकट होता है आयुर्वेद सद्भाव को बढ़ावा देकर प्रकृति की सहायता करता है एवं व्यक्ति और प्रकृति के बीच उसके नियमों के अनुसार संतुलन का जीवन बनता है। प्राचीन काल में आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने मन और शरीर के गठबंधन को संरक्षित करने की आवश्यकता को महसूस किया और मानव जाति को हमारी मानवता के सूक्ष्म पहलुओं को याद रखना और पोषण करने के लिए उपकरण प्रदान दीजिए आयुर्वेद मन शरीर परिसर के विखंडन और विकार को ठीक करने और सभी लोगों के पूर्णता और सद्भाव बहाल करने का प्रयास करता है।
आयुर्वेद का पहला सिद्धांत है त्रिगुण जिसमें तीन मौलिक सार्वभौमिक ऊर्जाएं अर्थात सत्य रजस्व और तमस शामिल है।
आयुर्वेद का दूसरा सिद्धांत है पंचमहाभूत जिसमें पांच मूल तत्व यानि पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल और वायु शामिल है।
आयुर्वेद के तीसरे सिद्धांत के रूप में ट्राइटोसिस यानि तीन शारीरिक हास् अर्थात वात पित्त और कफ शामिल है।
आयुर्वेद का चौथा सिद्धांत है सप्त धातु शरीर के सात प्रकार के ऊतक यानि रस रक्त मांसा मेड अस्थि मज्जा और शुक्राणु शामिल है।
आयुर्वेद का पांचवा सिद्धांत है त्रयोदोशअग्नि, पंचक अग्नि, जठर अग्नि सप्त वागनी और पंचभूत अग्नि शामिल है।
आयुर्वेद का छठा सिद्धांत है त्रिमाला यानि तीन प्रकार के शारीरिक अपशिष्ट मूत्र और श्वेत शामिल है।





