आज जब दो पीढ़ी के लोग आपस में बात करते हैं या हमारे दादा नाना जब आज के समय के रहन-सहन और जीवन शैली को देखते हैं तो उनके मुख से केवल एक ही शब्द आता है और वह है कि हमारे समय में यह नहीं हुआ करता था हमारे समय में लोग बीमार नहीं पड़ा करते थे या हमारे समय में इन तकनीकों का चलन नहीं हुआ था इत्यादि। लेकिन आज का दौर आधुनिक दौर है। हम जैसे-जैसे आधुनिक होते जा रहे हैं या आधुनिकता को अपनाते जा रहे हैं वैसे-वैसे हम अपने जीवन शैली हम अपने खान-पान रहन-सहन सोच विचारों के साथ भी लगातार समझौता करते जा रहे हैं। आज आधुनिक जीवन शैली में जहां एक और तकनीक ने हमारे जीवन को बहुत सुविधाजनक और आराम दायक बना दिया है वहीं दूसरी ओर खानपान की आदतों और जीवन शैली ने जिस चीज को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वह है हमारा स्वास्थ्य। हमारी जीवन शैली हर दिन के कामों और व्यवहारों का रूप है जिसके अंतर्गत जो काम हम करते हैं या जो खान-पान हम अपनाते हैं या जैसा हमारा व्यवहार होता है उस पर निर्भर करता है। यदि इस आधुनिकता में किसी के साथ सबसे अधिक समझौता हुआ है तो वह है हमारा स्वास्थ्य हमारा शरीर। तो चलिए एक नजर हम अपने स्वास्थ्य और इस आधुनिकता के कारण हमारे जीवन में होने वाले बदलाव पर डालते हैं।
आधुनिक जीवन शैली व स्वास्थ्य
हम सभी तो यह बात जानते हैं कि गुस्सा करना हमारे सेहत के लिए बहुत हानिकारक है लेकिन सवाल यह है क्या आपने गुस्सा करना छोड़ा? जो चीज इस जीवन शैली में इंसान में सबसे ज्यादा बढ़ रही है वह हैं इंसान के अंदर का गुस्सा। छोटी-छोटी बातों में भी इंसान गुस्सा करने लगता है इस गुस्से की वजह तनाव, काम का प्रेशर, चिड़चिड़ापन हो सकता है लेकिन इस गुस्से का प्रभाव हार्ट अटैक, मानसिक रोग जैसी बीमारियां होती हैं।
पुराने समय में बुढ़ापे में होने वाला रोग वह आज कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं डायबिटीज की। वैसे तो इसके होने का मुख्य कारण इंसुलिन की मात्रा में कमी होना है परंतु असंतुलित जीवन शैली जैसे मोटापा अधिक मात्रा में जंक फूड खाना, मीठा खाना, अधिक चीनी का सेवन एक्सरसाइज ना करना शारीरिक निष्क्रियता भी इसको जन्म देती है। हालांकि इतनी सारी तकनीक से घिरे होने के बावजूद या यूं कह लीजिए कि इतनी सारी जानकारी के बावजूद हमने अपने जीवन शैली को सुधारने में एक प्रतिशत भी योगदान नहीं दिया जिसका परिणाम यह होता है कि आजकल 30 से 35 साल की उम्र तक के नौजवानों को भी डायबिटीज के लक्षण दिखने लगते हैं।
आधुनिक जीवन शैली पूरी तरह से स्वाद पर टिकी है यानी जो स्वाद हमारे मुख को अच्छा लगता है हम उसके प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं यह जानने के बावजूद कि वह हमारे सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जैसे अधिक नमक खाने की वजह से समय से पहले ही बुढ़ापा जाता है परंतु फिर भी अधिक नमक का सेवन चुकी हमारे जिव्हा को काफी पसंद है हम उसका सेवन करते हैं। खानपान की बुरी आदतों के कारण हृदय रोग का खतरा भी बढ़ता है जिसमें कम उम्र में हार्ट अटैक का आना एक आम बात है। आजकल युवाओं में मानसिक तनाव भी बढ़ता जा रहा है इसके बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि काम का बोझ अकेलापन पारिवारिक झगड़े इत्यादि अधिक मानसिक तनाव आगे चलकर मानसिक बीमारियों का भी रूप ले लेता है। इस आधुनिक जीवन में डायबिटीज हार्ट अटैक के बाद जो बीमारी सबसे अधिक मात्रा में बढ़ती जा रही है वह है मोटापा और इसका मुख्य कारण हम सभी जानते हैं और वह है बुरी आदतें ज्यादा खानपान और एक्सरसाइज ना करना। अत्यधिक मात्रा में जंक फूड कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से मोटापा बढ़ता जाता है और जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं।
व्यायाम और प्राकृतिक चिकित्सा का महत्त्व
अब जब हमारे जीवन शैली बिगड़ ही चुकी हैं हमने अपने जीवन शैली खानपान को अपने स्वाद और मन की इच्छाओं के साथ समझौता कर ही लिया अपने स्वास्थ्य के साथ समझौता कर ही लिया है तो चलिए इससे निपटने के कुछ उपाय भी आपको बताते हैं। व्यायाम यानी एक्सरसाइज यह मनुष्य के जीवन का एक अहम हिस्सा होना चाहिए। पुराने समय में लोगों को व्यायाम का महत्व बहुत अच्छी तरीके से मालूम थी जिस कारण उनकी सेहत भी अच्छी बनी रहतीं थीं। आपको बता दे की प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग एक अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने में हमारी मदद करता है। साथ ही जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाता है ऐसी कई बीमारियां हैं जो आधुनिक युग में दी हैं जैसे कि स्ट्रोक, कैंसर, मधुमेह, गठिया आदि प्राकृतिक चिकित्सा से नियंत्रित होती है और अन्य रोग भी नहीं होते।
नेचुरोपैथी एक प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली है जिसमें दवाओं का उपयोग किए बिना रोगों को ठीक किया जाता है। नेचुरोपैथी में कई रोगों को रोकने की क्षमता है और जो रोग हो चुके हैं उनका इलाज आप कर सकते हैं। एक अच्छा स्वास्थ्य मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया सबसे अच्छा उपहार है लेकिन आज के दौर में व्यक्ति अपनी यांत्रिक जीवन शैली में इतना व्यस्त होता जा रहा है या यूं कह लीजिए कितना लापरवाह होता जा रहा है कि उसने खुद को प्रकृति से बिल्कुल दूर ही कर लिया है। नेचुरोपैथी एवं योग का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी दिनचर्या बदलकर स्वस्थ रहने की कला सिखाता है इससे न केवल रोग ठीक हो सकते हैं बल्कि शरीर भी मजबूत बनता है और चेहरे पर एक अलग ही रौनक आती है। प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के द्वारा मनुष्य अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकता है इस व्यक्ति के जीवन के शारीरिक मानसिक नैतिक और आध्यात्मिक भागों के रचनात्मक सिद्धांतों के साथ-साथ व्यक्ति के सद्भाव का भी निर्माण होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में चार तरीकों से इलाज किया जाता है जिसमें खाद्य थेरेपी मिट्टी थेरेपी जल चिकित्सा एवं मालिश शामिल है। खाद्य चिकित्सा के अंतर्गत जितना संभव हो किसी भी आहार को प्राकृतिक तरीके में ही खिलाया जाता है क्योंकि प्राकृतिक चिकित्सा में खाद चिकित्सा का मानना है कि प्राकृतिक रूप में सेवन करने पर कई खाद्य पदार्थ अपने आप में ही एक दवा का कार्य करते हैं जैसे ताजा फल ताजी हरी पत्तेदार सब्जियां अंकुरित अनाज को लेना ही काफी नहीं है आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि किस चीज को कितने अनुपात में लेना है।
इसके बाद आती है मिट्टी थेरेपी शरीर में मादक द्रव्यों को निकालने के लिए मिट्टी का स्नान मिट्टी का लेप मिट्टी की पट्टी का प्रयोग किया जाता है यह विशेष रूप से उच्च रक्तचाप तनाव सर दर्द चिंता कब्ज गैस्ट्रिक और त्वचा विकार आदि बीमारियों के लिए किया जाता है अतः सप्ताह में एक बार अवश्य संपूर्ण शरीर का मिट्टी स्नान या मिट्टी लेप लेना चाहिए। वही जल चिकित्सा में स्वच्छ ताजी और ठंडे पानी का उपयोग किया जाता है इस उपचार के बाद शरीर ताजा और सक्रिय महसूस करता है एवं अलग-अलग बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। वहीं अगर मालिश थेरेपी की बात करें तो शरीर की मांसपेशियों को स्वस्थ एवं सक्रिय रखने कि कल का नाम ही मालिश या मसाज है किंतु यह एक ही तरह से नहीं होती भिन्न-भिन्न प्रकार से शरीर को थपथपा कर और त्वचा पर विभिन्न तरीकों से हाथ फेर कर मालिश की जाती है। जिससे कई प्रकार की बीमारियों का भी इलाज होता है।
योग
योग की बात करें तो योग के द्वारा शारीरिक मानसिक धार्मिक आध्यात्मिक उद्देश्यों की पूर्ति होती है योग या व्यायाम करने से न सिर्फ शरीर तंदुरुस्त होता है बल्कि मस्तिष्क भी स्वस्थ व तंदुरुस्त होती है। आज के आधुनिक युग में शरीर में तो बीमारियां हो ही रही हैं मस्तिष्क भी इससे काफी प्रभावित है। मानसिक रोग हमारे भारतवर्ष में बहुत अधिक मात्रा में बढ़ती जा रही है और जिसका उपचार योग हो सकता है। भारत युवाओं का देश है वर्तमान में भारत में लगभग 65% युवा है। आज युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या है बेरोजगारी आज स्थिति ऐसी हो गई है कि देश का हर व्यक्ति चाहे पढ़ा लिखा है या नहीं रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है और अपना स्वास्थ्य खराब कर रहा है। बेरोजगारी के कारण फैक्ट्री कंपनियों आदि में जाकर काम करने के लिए दिन प्रतिदिन व पलायन कर रहा है यदि देश के शहरों में गांव में प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली को स्थापित किया जाए और व्यायाम को अपने जीवन में थोड़ा समय दिया जाए तो आज के आधुनिक युग में होने वाली बीमारियों और मानसिक रोगों से लड़ने में मदद मिल सकती है। देश में निवास करने वाले युवाओं को जो थोड़े पढ़े लिखे हैं और शिक्षित हैं उन्हें प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का प्रशिक्षण प्रदान करके बेरोजगारी की समस्या को भी काफी हद तक दूर किया जा सकता है।






