सेना प्रमुख बनते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला जम्मू दौरा काफी मायने रखता है। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह दौरा पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश है कि सेना की नई लीडरशिप आतंकवाद के मसले को लेकर काफी गंभीर है।
नए आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने पदभार संभालते ही चीन और पाकिस्तान को संकेतों में बड़ा संदेश दिया है। बुधवार को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला दौरा जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा का रहा। जहां उन्होंने एलओसी पर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। वहीं, लेह स्थित 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला भी पूर्वी लद्दाख में उस जगह पहुंचे, जहां आज से चार साल पहले भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इन दोनों ही दौरों से चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश गया है कि सेना की नई लीडरशिप दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
एलओसी से सटे फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचे आर्मी चीफ
01 जुलाई को भारतीय सेना प्रमुख का कार्यभार संभालते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी बुधवार को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के से सटी फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचींद्र कुमार और व्हाइट नाइट कोर (16 कोर) के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा भी साथ थे। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। इस दौरान नॉर्दन आर्मी कमांडर और व्हाइट नाइट कोर कमांडर ने सेना प्रमुख को जमीनी स्तर पर ऑपरेशन तैयारियों की जानकारी दी। वहीं उन्होंने पुंछ पहुंच कर सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक भी की। नियंत्रण रेखा का दौरा करने के बाद वह नगरोटा पहुंचे, जहां उन्होंने सेना के कमांडरों से मुलाकात की और जम्मू क्षेत्र में आतंक के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन का जायजा लिया।
नॉर्दन कमांड के कमांडर रह चुके हैं जनरल उपेंद्र द्विवेदी
सैन्य सूत्रों ने बताया कि सेना प्रमुख बनते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला जम्मू दौरा काफी मायने रखता है। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह दौरा पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश है कि सेना की नई लीडरशिप आतंकवाद के मसले को लेकर काफी गंभीर है। खुद आर्मी चीफ नॉर्दन कमांड के कमांडर रह चुके हैं। वह जम्मू-कश्मीर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। निश्चित तौर पर उनका वह अनुभव अब काम आएगा। अगर पाकिस्तान उस इलाके में कोई उल्टा-सीधा कदम उठाएगा, तो वह उसके लिए आत्मघाती साबित होगा।





