राजस्थान के 17 नए जिलों पर बड़ा अपडेट, इन नए जिलों पर मंडराया संकट

राजस्थान के कुछ नए जिलों में संकट की स्थिति बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दो दिनों में नए जिलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी ललित के. पंवार ने 17 नए जिलों और 3 नए संभागों के गठन की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट शुक्रवार शाम प्रमुख राजस्व सचिव दिनेश कुमार को सौंपी। इस रिपोर्ट को मंत्रिमंडलीय उपसमिति के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी बैठक 2 सितंबर को दोपहर 3 बजे होगी। इसी बीच, नए जिलों और संभागों की स्थिति में संभावित बदलाव के सवाल पर पंवार ने ‘नो कमेंट’ कहकर अपनी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। राजस्थान के कुछ नए जिलों को लेकर संकट की स्थिति है और यह संभावना है कि दो दिन बाद होने वाली बैठक में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौनसा नया जिला बना रहेगा और कौनसा नहीं।
पिछले साल, अशोक गहलोत सरकार ने प्रदेश में जिलों की संख्या 33 से बढ़ाकर 50 और संभागों की संख्या 7 से बढ़ाकर 10 कर दी थी। इनका गठन भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी रामलुभाया की सिफारिश पर किया गया था। भजनलाल सरकार ने इन जिलों और संभागों की समीक्षा के लिए उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है। इस उपसमिति के सहयोग के लिए 1 जुलाई को पूर्व आईएएस पंवार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था, जिसमें वित्त, ग्रामीण विकास-पंचायती राज, और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को सदस्य और प्रमुख राजस्व सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया था। पंवार समिति ने नए जिलों और संभागों के क्षेत्राधिकार, संचालन, प्रशासनिक आवश्यकताओं और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर विचार किया है। दूदू, खैरथल तिजारा, केकड़ी, सलूम्बर, सांचोर और शाहपुरा के जिलों के साथ-साथ बांसवाड़ा को संभाग बनाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए गए थे। जयपुर और जोधपुर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को अलग-अलग जिलों में विभाजित करने को लेकर भी विवाद उत्पन्न हो गया था। मालपुरा, सुजानगढ़ और कुचामनसिटी को 6 अक्टूबर, 2023 को नए जिले बनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद 7 अक्टूबर को सर्कुलेशन के माध्यम से इनके गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दी, लेकिन इनके जिलों की अधिसूचना जारी नहीं हो पाई थी, जिस कारण से ये जिले नहीं बन सके। इसी प्रकार विराटनगर और सांभर के जिलों के नहीं बनने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading