राजस्थान के लगभग 40 लाख अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लग सकता है। सरकारी भर्ती परीक्षाओं में “वन टाइम रजिस्ट्रेशन शुल्क” योजना को खत्म कर, दोबारा परीक्षा शुल्क वसूलने पर विचार किया जा रहा है। यह कदम बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की गैरहाजिरी को देखते हुए उठाया जा रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना को अब भाजपा सरकार बंद करने की तैयारी में है।
वन टाइम रजिस्ट्रेशन के तहत अभ्यर्थी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के भर्ती परीक्षाओं में आवेदन कर रहे थे। लेकिन अब सरकार फिर से प्रत्येक परीक्षा के लिए आवेदन शुल्क वसूलने का निर्णय ले सकती है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने हाल ही में इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर जल्द निर्णय लिया जा सकता है।
अभी स्थिति यह है कि चयन बोर्ड और आरपीएससी की परीक्षाओं में औसतन 60% अभ्यर्थी ही उपस्थित हो रहे हैं। हाल ही में आयोजित परीक्षाओं में कनिष्ठ अनुदेशक परीक्षा की सुबह की पाली में 60% और दोपहर की पाली में 40% से भी कम उपस्थिति दर्ज हुई। महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में 50.13% और छात्रावास अधीक्षक परीक्षा में 60.64% अभ्यर्थी शामिल हुए। वहीं, आरपीएससी द्वारा आयोजित सहायक सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा में सिर्फ 17.46% उपस्थिति रही।
गैरहाजिरी की वजह से सरकार और बोर्ड पर परीक्षाओं का खर्च बढ़ रहा है। चयन बोर्ड के अनुसार, एक अभ्यर्थी पर औसतन ₹600 खर्च होता है, जिसमें पेपर प्रिंटिंग, परिवहन, परीक्षा केंद्र की व्यवस्था और शिक्षकों की ड्यूटी का खर्च शामिल है। लेकिन 40% गैरहाजिरी की वजह से सरकार का वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।
आवेदन करने के बाद भी अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं आ रहे हैं। सरकार ने आवेदन शुल्क नि:शुल्क कर रखा है। इसलिए अभ्यर्थी एक साथ कई भर्तियों में आवेदन कर देते हैं। इससे परीक्षाओं का खर्चा बढ़ रहा है। हमने एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है। परीक्षा शुल्क तय किया जाए।
अलोक राज, अध्यक्ष राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड
यह बेरोजगारों के साथ धोखा होगा। इसे किसी भी स्थिति में लागू नहीं होने देंगे। बोर्ड अधिकारियों से निवेदन है इस प्रस्ताव को वापस लिया जाए
हनुमान किसान, नेशनल फ्रीडम यूनियन राजस्थान
राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में परीक्षा शुल्क फिर से वसूलने की तैयारी






