जयपुर। शिक्षा विभाग ने एक बार फिर 37 हजार अधिशेष शिक्षकों के समायोजन के आदेश जारी किए हैं। इससे पहले भी विभाग ने इसी तरह के आदेश जारी किए थे, लेकिन बाद में वापस ले लिए गए। इन नए आदेशों पर भी शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि विभाग ने शिक्षकों के समायोजन के लिए सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इन आदेशों में उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया है।
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस विषय में मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने आग्रह किया है कि 37 हजार से अधिक शिक्षकों का समायोजन जल्द से जल्द किया जाए, ताकि उनकी मूल पदों और एसीपी (वार्षिक वेतनवृद्धि) संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके। संगठन का कहना है कि समायोजन शाला दर्पण पर विषय के स्वीकृत पदों के अनुसार किया जाए, न कि 2015 के समानीकरण नियमों के आधार पर। उन्होंने जोर दिया कि यह समायोजन 2021 के नियमानुसार होना चाहिए।
संगठन के मुख्य महामंत्री महेंद्र पांडे ने कहा कि अधिशेष शिक्षकों के समायोजन के लिए प्रस्तावित नियमों से नई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शिक्षक संगठनों के सुझाव
- सी.सै. स्कूलों के पदों की स्वीकृति: जिन सी.सै. स्कूलों में पद स्वीकृत नहीं हैं, वहां 30-04-2015 के स्टाफिंग पैटर्न के आधार पर पद मानकर समायोजन किया जाए। नव क्रमोन्नत सी.सै. स्कूलों में छात्र संख्या 80 होने पर हिंदी और अंग्रेजी व्याख्याता के पद अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएं।
- अध्यापक लेवल-1 के पद: कक्षा 1 से 5 में 60 से अधिक छात्रों पर प्रत्येक 30 छात्रों के लिए एक लेवल-1 अध्यापक का प्रावधान है। लेकिन कई स्कूलों में यह स्पष्ट नहीं है कि समायोजन 2 स्वीकृत पदों के अनुसार होगा या अतिरिक्त छात्रों के आधार पर।
- शारीरिक शिक्षक के पद: कई उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हैं। इन शिक्षकों के समायोजन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
- हेड टीचर पद: जिन स्कूलों में कक्षा 1 से 5 में 150 से अधिक छात्र हैं, वहां हेड टीचर (वरिष्ठ अध्यापक) का पद स्वीकृत होना चाहिए। लेकिन अस्पष्टता के कारण वरिष्ठ अध्यापक सामाजिक को अधिशेष माना जा रहा है।
- महात्मा गांधी विद्यालयों की समस्या: 2022 में चयनित शिक्षकों के पदों को अधिशेष कर संविदा शिक्षकों को वहीं कार्यरत रखने की विसंगति को दूर किया जाए।
इन सुझावों को लागू करने की मांग करते हुए शिक्षक संगठनों ने इसे आवश्यक बताया है ताकि समायोजन प्रक्रिया निष्पक्ष और समस्यारहित हो सके।
शिक्षा विभाग ने दो बार पहले भी ऐसे आदेश निकाले, लेकिन वापस ले लिए। शिक्षक संगठनों ने आपत्ति भी मांगी, लेकिन इस बार जारी आदेश में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। खामियों भरा आदेश हैं। इसे सुधारा जाना चाहिए। विवाद की स्थिति पैदा होगी।
-विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान प्रा. एवं मा. शिक्षक संघ






