आज हम आपको एक ऐसे किले के बारे में बताएंगे, जहां मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा तीनों स्थित हैं। इस जगह का पौराणिक संबंध माता पार्वती से है। गुरुद्वारे का संबंध सिखों के छठे गुरु, गुरु गोबिंद सिंह से भी है। कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील और उसके आसपास का नज़ारा इस किले से बेहद शानदार दिखता है।
हरि पर्वत किला
श्रीनगर के डल झील के पश्चिमी किनारे पर स्थित यह ऐतिहासिक किला अपनी वास्तुकला और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। इस किले में प्रवेश के लिए दो दरवाजे बने हुए हैं।
- किला डल झील के पश्चिम में स्थित है।
- 1590 में मुगल बादशाह अकबर ने यहां एक लंबी दीवार बनवाई थी।
- 1808 में अफगान गवर्नर अत्ता मोहम्मद खान ने इसका निर्माण करवाया।
इस किले को कश्मीरी संस्कृति और इतिहास का प्रतीक माना जाता है। इसे कूह-ए-मारन भी कहा जाता है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
- मंदिर: किले के एक तरफ मां दुर्गा के शारिका देवी के मंदिर का महत्व है।
- मस्जिद: दूसरी तरफ सुल्तानुल आरिफ शेख मखदूम साहब की दरगाह है।
- गुरुद्वारा: पहाड़ी के दूसरे छोर पर सिखों के छठे गुरु के सम्मान में गुरुद्वारा स्थित है।
पौराणिक कथा
हरि पर्वत का नाम एक प्राचीन किंवदंती से लिया गया है। कथा के अनुसार, माता पार्वती ने असुर जलोभवा का वध करने के लिए एक बड़े पत्थर का उपयोग किया था। इस पत्थर को शारिका देवी का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।
यात्रा की जानकारी
- श्रीनगर रेलवे स्टेशन से यह किला लगभग 17 किमी दूर है।
- श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से किले की दूरी 16.7 किमी है।
- टैक्सी या स्थानीय परिवहन से किले तक पहुंचा जा सकता है।
डल झील पर शिकारे की सवारी करते हुए इस किले का भव्य नज़ारा देखा जा सकता है। यह किला आज जम्मू-कश्मीर सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ लगती है।





