उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1 लाख से अधिक एचआईवी संक्रमित पंजीकृत हैं, जिनमें से 60% युवा (18-24 वर्ष की उम्र के) हैं। एचआईवी संक्रमितों की संख्या में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। हर उम्र के लोग इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि कम उम्र के युवक और युवतियां तेजी से इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। कुल संक्रमितों में इनकी हिस्सेदारी लगभग 60% है।
उत्तर प्रदेश में 1,20,412 एचआईवी संक्रमित पंजीकृत हैं। सिर्फ़ केजीएमयू में ही लगभग 4,000 और लखनऊ के अन्य केंद्रों में लगभग 2,000 मरीज पंजीकृत हैं। इन सभी मरीजों का इलाज एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) केंद्रों पर हो रहा है। मरीजों को मुफ्त जांच, दवा और काउंसिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
आंकड़ों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण सबसे अधिक युवाओं को प्रभावित कर रहा है। 18 से 24 वर्ष की उम्र के संक्रमितों की संख्या कुल संक्रमितों का 60% है, जबकि शेष 40% संक्रमितों की उम्र 24 वर्ष से अधिक है। एड्स के इलाज की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था के कारण मरीजों की दवा बीच में छूटने की संभावना बहुत कम हो गई है। उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसाइटी दवा खत्म होने से पहले संक्रमितों को मोबाइल पर संदेश भेजती है, जिससे वे समय पर नजदीकी केंद्र से दवा प्राप्त कर सकें। आमतौर पर संक्रमितों को एक महीने की दवा दी जाती है।
एचआईवी कैसे फैलता है:
• संक्रमित रक्त चढ़ाने या सुई साझा करने से।
• असुरक्षित यौन संबंध (गर्भनिरोधक का उपयोग न करने पर)।
• गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान।
• संक्रमित सुइयों या उपकरणों के उपयोग से।
एचआईवी कैसे नहीं फैलता है:
• हाथ मिलाने, गले लगाने या छूने से।
• खाना-पीना साझा करने या पानी-भोजन के उपयोग से।
• खांसने, छींकने या सामान्य सांस लेने से।
• मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने से।
• स्विमिंग पूल, शौचालय या बिस्तर साझा करने से।
• पसीने, आंसू या लार के संपर्क से।
महत्वपूर्ण जानकारी:
एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है। एचआईवी, जो एड्स का कारण बनता है, यह सामान्य दैनिक संपर्क से नहीं फैलता।





