चीन में फैले एचएमपीवी वायरस ने पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बना दिया है। भारत में एचएमपीवी का पहला मामला सामने आने के बाद प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ पर इसके संभावित प्रभाव का खतरा बढ़ गया है। एचएमपीवी, यानी ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस का भारत में पहला केस बेंगलुरु में एक 8 महीने की बच्ची में पाया गया है। इसके बाद चिकित्सा विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि, कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट एक निजी अस्पताल से आई है, उनकी लैब में इसकी जांच नहीं हुई है।
‘चीन से आने वालों पर प्रतिबंध लगाने की मांग’
भारत में एचएमपीवी वायरस का असर महाकुंभ पर भी देखा जा रहा है। संतों ने इस खतरे से निपटने के लिए चीन से आने वाले लोगों पर रोक लगाने की अपील की है। उनका कहना है कि महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ इकट्ठा होती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियां
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा है कि फिलहाल डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन कुंभ मेले में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। वायरस से निपटने के लिए महाकुंभ में 100 बेड का अस्पताल तैयार किया गया है, जहां 24 घंटे डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ मौजूद रहेंगे। भारतीय रेलवे ने प्रयागराज के रेलवे स्टेशनों पर विशेष चिकित्सा सुविधाओं के लिए 24×7 ऑब्जर्वेशन रूम बनाए हैं। इन स्टेशनों में प्रयागराज जंक्शन, प्रयाग जंक्शन, सूबेदारगंज, नैनी जंक्शन और प्रयागराज छिवकी स्टेशन शामिल हैं।
40-45 करोड़ लोगों के आने की संभावना
2025 में उत्तर प्रदेश में होने वाले महाकुंभ की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। यह आयोजन 14 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा और इसमें 40-45 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। नदी किनारे 4,000 हेक्टेयर में इसका आयोजन किया जाएगा।
एचएमपीवी वायरस क्या है?
एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस) मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, लेकिन गंभीर मामलों में यह निचले हिस्से में संक्रमण का कारण बन सकता है। यह वायरस मुख्यतः सर्दियों और वसंत के मौसम में फैलता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इसका संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।






