व्यक्ति जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं बल्कि गुणों से महान बनता है- नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में जाति आधारित राजनीति के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की महानता उसके गुणों से निर्धारित होती है, न कि जाति, धर्म या लिंग से। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस सिद्धांत से कोई समझौता नहीं करेंगे, भले ही इसके कारण उन्हें चुनावों में नुकसान उठाना पड़े। उनके इस बयान पर अब विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने गडकरी के बयान का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि वे गडकरी की बात से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि अगर नितिन गडकरी ने ऐसा बयान दिया है, तो इसका विशेष महत्व है। भाजपा में रहते हुए अगर वे इस तरह की बातें कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से इसके पीछे कोई कारण होगा। तारिक अनवर ने आगे कहा कि गडकरी हमेशा अपनी अलग सोच के लिए जाने जाते हैं और कई बार सरकार और पार्टी की सामान्य विचारधारा से हटकर बयान देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज में शिक्षा की आवश्यकता को सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भी उजागर किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय शिक्षा और नौकरियों के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है। अगर पूरे देश को मजबूत बनाना है, तो मुस्लिम समाज को मुख्य धारा में लाना आवश्यक होगा।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी गडकरी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं और अक्सर भाजपा के नेताओं को आईना दिखाने का काम करते हैं। दुबे ने कहा कि जब भी देखा जाए, भाजपा विकास की बजाय हिंदू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद और नफरत की राजनीति कर रही है। गडकरी ने यहां तक कह दिया कि जो जात-पात की राजनीति करेगा, उसे सख्त जवाब मिलेगा।
गडकरी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को एपीजे अब्दुल कलाम या मौलाना आजाद की राह पर चलने की सलाह दी। उनकी बेबाकी के कारण कई बार भाजपा के भीतर भी असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नागपुर में एक दीक्षांत समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को सबसे अधिक शिक्षा की जरूरत है और जो भी जाति आधारित राजनीति करेगा, उसे करारा जवाब मिलेगा।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading