जाने आमेर किले का पूरा इतिहास
राजस्थान में अलग-अलग शासको के समय में ऐतिहासिक संरचनाओं को नष्ट भी किया गया तो कई नई शानदार इमारत का निर्माण किया गया लेकिन कई आपदाओं और बाधाओं को झेलते हुए भी आज आमेर का किला राजस्थान की शान को बढ़ा रहा है और गौरवपूर्ण एवं समृद्धि इतिहास कि याद दिलवाता है। राजस्थान के ऐतिहासिक किले देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मशहूर हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित आमेर का किला भी यहां के सबसे चर्चित स्थलों में से एक रहा है। राजस्थान अपने पुराने किलों के लिए काफी प्रसिद्ध है। 16वीं सदी में बना यह आमेर का किला राजस्थानी कला और संस्कृति का एक अद्भुत नमूना है यह किला एक स्वर्णिम युग का साक्षी रहा है। इसका निर्माण स्थानीय मीणाओ ने करवाया था। एक ऊंची पहाड़ी पर बना आमेर का किला दूर से भव्य नजर आता है। पुराने समय के सभी राजा महाराजा इसी प्रकार के किलाओं में रहते थे। और यह बात हम सभी जानते हैं की राजस्थान के सभी राजपूत घराने के राजा इसी प्रकार के किला बना कर अपनी शान दिखाया करतें थें, जो देखने में अत्यन्त खूबसूरत हुआ करता था। तो चलिए आज हम आपको विस्तार से आमेर किले का इतिहास बताते हैं।

क्या है आमेर किले का इतिहास
राजपूताना वास्तु शैली से निर्मित आमेर का किला राजस्थान के सबसे बड़े किलो में से एक है जो की जयपुर से करीबन 11 किलोमीटर की दूरी पर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है। वहीं अगर आमेर के इतिहास और इस किले के निर्माण पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि आमेर पहले सूर्यवंशी कछ की राजधानी रह चुका है जिसका निर्माण मीना नामक जनजाति द्वारा करवाया गया था। इतिहासकारों की माने तो राजस्थान के सबसे बड़े आमेर के किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा मानसिंह प्रथम द्वारा करवाया गया जिसके बाद करीबन 150 सालों तक राजा मानसिंह के उत्तराधिकारियों और शासको ने इस किले का विस्तार और नवीनीकरण का काम किया था। सन 1727 में सवाई जयसिंह द्वितीय ने अपने शासनकाल के दौरान अपनी राजधानी आमेर से जयपुर को बना लिया उस समय जयपुर की हाल ही में स्थापना की गई थी। जयपुर से पहले कछवाहा राजवंश की राजधानी आमेर ही थी। भारत की सबसे प्राचीनतम किलो में से एक आमेर के किले को पहले महल के नाम से जाना जाता था। इसके अंदर शिला माता देवी का मशहूर मंदिर भी स्थित है। जिसका निर्माण राजा मानसिंह द्वारा करवाया गया था। कुछ लोगों का मानना है कि इस किले का नाम आमेर भगवान शिव के नाम अंबिकेश्वर पर रखा गया था। जबकि कुछ लोग आमेर किले के नाम को लेकर ऐसा मानते हैं कि इस किले का नाम मां दुर्गा का नाम अंबा से लिया गया है। राजस्थान की सबसे मशहूर और भाव किले में अलग-अलग शासको के समय में किले के अंदर कई ऐतिहासिक संरचनाओं को नष्ट भी किया गया तो कई नई शानदार इमारत का निर्माण किया गया लेकिन कई आपदाओं और बाधाओं को झेलते हुए भी आज यह आमेर का किला राजस्थान की शान को बढ़ा रहा है और गौरवपूर्ण एवं समृद्धि इतिहास कि याद दिलवाता है।
आमेर किला
आपको बता दे क्या अमेर का किला 16वींसदी में राजा मानसिंह के समय में बनना शुरू हुआ था लेकिन राजा सवाई जय सिंह द्वितीय और राजा जयसिंह प्रथम के समय में भी इसका निर्माण कार्य चलता रहा। इन राजाओं के प्रयासों के चलते इस किले को वर्तमान स्वरूप मिला। इन राजाओं ने इस किले की वस्तु कला पर विशेष ध्यान दिया इसलिए इसे बनकर तैयार होने में काफी वक्त लगा। राजा मानसिंह से राजा सवाई जयसिंह द्वितीय और राजा जयसिंह तक के शासनकाल में 100 साल का समय बीत गया। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि आमेर के किले में शिला देवी मंदिर स्थित है इस मंदिर के पीछे एक बड़ा ही रोचक किस्सा जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि राजा मानसिंह के सपनों में मां काली ने दर्शन दिए और उनसे अपनी प्रतिमा खोजने को कहा। राजा मानसिंह ने मां के आदेश का पालन किया लेकिन उन्हें वहां मन की मूर्ति मिलने के बजाय एक बड़ा सा पत्थर मिला। शिला देवी की प्रतिमा खोजने के लिए इस पत्थर की सफाई की गई और इस तरह यहां शिला देवी का मंदिर बन गया आज भी सभी श्रद्धालु इस मंदिर में गहरी आस्था रखते हैं। किले के भीतर की सबसे खूबसूरत जगह में से एक है शीश महल। इस भवन की विशेषता यह है कि यहां शीशे इस तरह से लगाए गए हैं जिसमें लाइट जलने पर पूरा भवन जगमगा उठता है। बॉलीवुड डायरेक्टर्स के लिए जगह फेवरेट रही है दिलीप कुमार और मधुबाला की फिल्म मुग़ल-ए-आज़म के गाने प्यार किया तो डरना क्या की शूटिंग यहीं हुई थी।

आमेर किले की संरचना
जयपुर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी परस्थित राजस्थान के इस विशाल किले का निर्माण हिंदू और राजपूताना शैली द्वारा किया गया है। इस किले को बाहर से देखने पर यह मुग़ल वास्तु शैली से प्रभावित दिखाई पड़ती है जबकि अंदर से किला राजपूत स्थापत्य शैली में बना हुआ है। यह किला मुगल और हिंदू वास्तु शैली का नायाब नमूना है। इस किले के अंदर प्राचीन वास्तु शैली एवं इतिहास के प्रसिद्ध एवं साहसी राजपूत शासको की तस्वीर भी लगी हुई है। इस विशाल किले के अंदर बने ऐतिहासिक महल उद्यान जलाशय एवं सुंदर मंदिर इसकी खूबसूरती को दोगुना कर देते हैं। राजस्थान के आमेर किले में पर्यटक इस किले के पूर्व में बने प्रवेश द्वार से अंदर घुसते हैं और यह द्वारा किले का मुख्य द्वार है जिससे कि सुरज पोल या सूर्य द्वार भी कहा जाता है। वही इस किले के दक्षिण में भी एक भव्य द्वार बना हुआ है जो की चाँदपोल द्वारा के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के सबसे विशाल आमेर के किले को 16वीं शताब्दी में राजा मानसिंह द्वारा बनवाया गया था हिंदू एवं मुगलकालीन वास्तु शैली से निर्मित यह अनूठी संरचना अपनी भव्यता और आकर्षक की वजह से साल 2013 में यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज की साइट में शामिल की गई थी। भारत की सबसे महत्वपूर्ण किलो में से एक इस आमेर के किले के परिसर में बनी महत्वपूर्ण संरचनाओं में शीश महल दीवाने आम सुख निवास आदि शामिल है। जयपुर के पास स्थित इस विशाल किले का निर्माण विशेष तौर पर राजशाही परिवार के रहने के लिए किया गया था इस किले के परिसर में बनी ऐतिहासिक संरचनाओं में शीश महल सबसे मुख्य है जो कि अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही शीश महल दुनिया का सबसे बेहतरीन कांच घर भी माना जाता है। साल 2007 के आंकड़ों के मुताबिक उसे साल यहां करीबन 15 लाख से ज्यादा पर्यटक आमेर के किले की खूबसूरती को देखने आए थे इस विशाल दुर्गा के अंदर के पर्यटकों के लिए एक आकर्षक बाजार भी लगता है जहां पर सैलानी रंग बिरंगे पठार एवं मोतियों से बनी वस्तुओं के अलावा आकर्षण हस्तशिल्प की वस्तु में खरीद सकते हैं। राजस्थान के सबसे आकर्षित और महत्वपूर्ण किले में बॉलीवुड एवं हॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों की भी शूटिंग की जा चुकी है जिसमें बॉलीवुड फिल्म बाजीराव मस्तानी, शुद्ध देसी रोमांस, मुग़ल-इ-आज़म, भूल भुलैया, जोधा अकबर आदि शामिल है वही हॉलीवुड फिल्मों में द बेस्ट एग्जॉटिक आदि शामिल है।
मशहूर लाइट एंड साउंड शो
राजस्थान के सबसे विशाल किले में रोजाना शाम को लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है यह अशोक पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ खींचते हैं वहीं यह शो आमेर के किले के खूबसूरत इतिहास और साहसी राजाओं के बारे में भी बताता है। यह शो करीब 50 मिनट तक चलता है आपको बता दें कि शो को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी है पर्यटकों को इस शो को देखने के लिए अलग से टिकट भी लेनी पड़ती है।



