योगी सरकार के आठ साल…. वाह से आह तक

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे कर लिये हैं, जबकि कुल मिलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आठ साल पूरा कर चुके हैं। यूपी में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकार्ड भी योगी के नाम हो गया है। करीब 24 करोड़ आबादी को यदि योगी से पूर्व की सरकारों के तौरतरीकों की याद होगी तो वह जानते होंगे कि आठ साल पहले प्रदेश का क्या हाल था। यूपी की गणना बीमारू राज्य के रूप में होती थी। साम्प्रदायिक हिंसा, संगठित अपराध, दबंगई के बल पर जमीन पर कब्जा अखिलेश सरकार की पहचान थी। आतंकवादियों के मुकदमें वापस लिये जाते थे। तुष्टिकरण समाजवादी सरकार की पहचान बन गई थी। दंगा पीड़ितों को उनका धर्म देखकर मुआवजा बांटने का कारनामा भी अखिलेश सरकार द्वारा किया गया था। सपा के नेता थानों तक में गुंडागर्दी करने से घबराते नहीं थे। आजम खान जैसे समाजवादी नेताओं की बदजुबानी के किस्से आम थे। हिन्दू देवी देवताओं का अपमान समाजवादी सरकार की आदत बन गई थी। हाल यह है कि आठ साल सत्ता से बाहर रहने के बाद भी अखिलेश की राजनीति नहीं बदली है। विकास के नाम पर अखिलेश एक्सप्रेस वे और लखनऊ में मेट्रो के अलावा कुछ नहीं गिना पाते थे।
एक वह दौर था जब प्रदेश की जनता त्राहिमाम कर रही थी तो अब फाइलों में विकास नहीं उलझता है, बल्कि जमीन पर फलफूल रहा है। अपराधी ठोके जा रहे हैं। भू माफियाओं से कब्जाई जमीन वापस ली जा रही है। संगठित अपराध करने वालों को चुन चुनकर मिटाया जा रहा है। मगर पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के प्रति धारणा बदलने में सफलता प्राप्त की है। कभी बीमारू राज्य कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज व्यवसाय एवं निवेश का सर्वश्रेष्ठ ठिकाना बनकर देश और दुनिया में पहचाना जा रहा है। उत्तर प्रदेश आज ‘ग्रोथ गियर’ है। हमें विरासत में अराजकता, अव्यवस्था और अपराध के अंधकार में डूबा हुआ प्रदेश मिला था। ऐसे राज्य को सुरक्षित परिवेश, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुगम कनेक्टिविटी और उद्यम अनुकूल नीतियों द्वारा निवेशकों का ड्रीम डेस्टिनेशन बनाने में हम लोग सफल रहे। विगत आठ वर्षों में प्रदेश को प्राप्त हुए 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव इसकी पुष्टि करते हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारा जा चुका है। इनके माध्यम से 60 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी तथा अन्य लाखों लोगों हेतु रोजगार का सृजन हुआ है। स्थापित सत्य है कि सुरक्षा के सुपथ पर ही विकास कुलांचे भरता है और सुगम कनेक्टिविटी उसे तीव्रता प्रदान करती है। ‘नया उत्तर प्रदेश’ उसका जीवंत उदाहरण है।
महान चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास ही अंत्योदय है। प्रधानमंत्री मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार की हर योजना में यह भाव श्वास लेता है। यही कारण है कि बीते आठ वर्षों में प्रदेश सरकार ने छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में सफलता प्राप्त की है। प्रदेश के 15 करोड़ निर्धनों को प्रतिमाह निःशुल्क अनाज, 1.86 करोड़ से अधिक परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन, 2.86 करोड़ से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5.21 करोड़ लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का चिकित्सा सुरक्षा कवच, 56.50 लाख से अधिक परिवारों को निःशुल्क आवास जैसे अनेक कल्याणकारी उपहारों ने प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाया है। सभी को आवास के संकल्प की सिद्धि के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के हर उस लाभार्थी को आवासीय पट्टा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया गया है, जिनके पास भूमि नहीं थी। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है। यही तो है अंत्योदय।
आजादी से लेकर 2017 तक प्रदेश में 12 मेडिकल कालेज थे। आज राज्य में 44 राजकीय मेडिकल कालेज और 36 निजी मेडिकल कालेजों सहित 80 मेडिकल कालेज संचालित हैं। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स का संचालन आरंभ हो गया है। ‘एक जनपद-एक मेडिकल कालेज’ की संकल्पना उत्तर प्रदेश में साकार हो रही है। प्रदेश में 122 चीनी मिलें क्रियाशील हैं। मार्च, 2017 से अब तक तीन नई चीनी मिलों की स्थापना हुई है। छह चीनी मिलों का पुनर्संचालन तथा 38 चीनी मिलों का क्षमता विस्तार हुआ है, जिससे लगभग 1.25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। आठ वर्षों में 46.50 लाख गन्ना किसानों को 2,80,223 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, पीएम स्वनिधि योजना जैसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं मातृशक्ति के जीवन में सकारात्मकता का सवेरा लेकर आई हैं। ग्रामीण क्षेत्र की 95 लाख से अधिक महिलाओं को ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़ने के साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को 2,510 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन, ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) घर की महिला के नाम आदि जैसी रचनात्मक पहल नारी शक्ति के जीवन में सम्मान और आर्थिक प्रगति का प्रतीक हैं।
प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने का युगांतरकारी कार्य किया है। वर्ष 2016 में प्रदेश की बेरोजगारी दर 18 प्रतिशत थी जो अब तीन प्रतिशत है। निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के जरिये विभिन्न आयोगों एवं भर्ती बोर्ड द्वारा साढ़े आठ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।
इनमें से 1.38 लाख से अधिक महिलाएं हैं। परीक्षाओं के शुचितापूर्ण आयोजन के लिए उ.प्र. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) कानून लागू किया गया है, जिससे छात्रों के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास जागा है। आठ वर्ष हमारी आस्था, अस्मिता, आर्थिकी और सांस्कृतिक चेतना के उन्नयन का ऐतिहासिक कालखंड है। सबसे बड़ी बात यह है कि बीते आठ वर्षों में प्रदेश में एक भी नया टैक्स नहीं लगाया गया। प्रदेश में डीजल-पेट्रोल दरें देश में सबसे कम हैं। इसके बाद भी उत्तर प्रदेश राजस्व सरप्लस स्टेट के रूप में समृद्धि के नए सोपान चढ़ रहा है। इस सफलता के पीछे रामराज्य की अवधारणा ही है।
खैर योगी राज में तमाम अच्छे कार्य हो रहे हैं तो कहा यह भी जा रहा है कि प्रदेश की सत्ता योगी तक केन्द्रित हो कर रह गई है। बीजेपी तक के सांसदों और विधायकों की नहीं सुनी जाती है। योगी का सख्त आदेश है कि कोई विधायक सिफारिश लेकर किसी अधिकारी या थाना-चौकी पर नहीं जायेगा, परिणाम स्वरूप ब्यूरोक्रेसी और पुलिस निरंकुश हो गई है। योगी सरकार ने निवेश आकर्षित करने और नए उद्योगों को स्थापित करने की दिशा में कई कदम उठाए, लेकिन बेरोजगारी की समस्या अभी भी बनी हुई है। सरकारी भर्तियों में देरी, पेपर लीक की घटनाएं और युवाओं को अपेक्षित संख्या में नौकरियां न मिलना एक बड़ी चुनौती रही है। वहीं योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के दावे काफी किए, लेकिन कई विभागों में रिश्वतखोरी और सरकारी अधिकारियों की मनमानी की शिकायतें बनी हुई हैं। खासकर तहसील, थाने और नगर निकायों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई बढ़ी है। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान न मिलने, फसलों के उचित दाम न मिलने और बिजली की बढ़ती दरों से किसान परेशान रहे हैं। सरकार ने अपराधियों पर कार्रवाई के लिए ‘ठोक दो’ नीति अपनाई, लेकिन पुलिस की मनमानी, फर्जी एनकाउंटर और निर्दोष लोगों पर अत्याचार के आरोप भी लगे। थानों में दलितों, पिछड़ों और गरीबों की सुनवाई न होने की शिकायतें अक्सर आती रही हैं।
योगी सरकार की बुलडोजर नीति को एक तरफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण बताया जाता है, लेकिन विपक्ष इसे पक्षपातपूर्ण और गरीबों के खिलाफ करार देता है। कई मामलों में बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ही घरों और दुकानों को ढहा दिया गया, जिससे विवाद हुआ। उधर, कई सरकारी योजनाओं की घोषणाएं हुईं, लेकिन उनका लाभ सभी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाया। पीएम आवास योजना, मुफ्त राशन योजना और स्वरोजगार योजनाओं में भ्रष्टाचार और भेदभाव की काफी शिकायतें सामने आईं हैं। कुल मिलाकर योगी सरकार की वाह-वाह भी खूब हो रही है, वहीं कुछ लोगों को लगता है कि योगी राज में जनता कराह रही है। उसकी आह को कोई सुनने वाला नहीं है।

अजय कुमार, लखनऊ

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