देश और राज्यों की प्रति व्यक्ति मासिक आय और सांसदों-विधायकों के वेतन का विश्लेषण से यह पता चला है कि देश के सांसद और अधिकतर राज्यों के विधायक आम जनता की औसत आय से कई गुना अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं। हाल ही में वेतन में बढ़ोतरी के बाद देश के सांसदों का मासिक वेतन 1.24 लाख रुपए हो गया है, जो कि देश की प्रति व्यक्ति औसत मासिक आय 17,132 रुपए की तुलना में सात गुना से अधिक है। राज्यों में पिछड़े माने जाने वाले झारखंड में विधायकों का मासिक वेतन 2.88 लाख रुपए है, जो प्रदेशवासियों की औसत मासिक आय 8,773 रुपए से 32 गुना ज्यादा है। यह देश में सबसे बड़ा आनुपातिक अंतर है। वहीं, छत्तीसगढ़ के विधायकों का वेतन प्रति व्यक्ति आय की तुलना में सबसे कम मात्र डेढ़ गुना है।
वेतन बढ़ोतरी का निर्णय
केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन को महंगाई सूचकांक से जोड़कर 2018 के बाद पहली बार बढ़ोतरी की है। हालांकि, अधिकतर राज्यों में विधायक स्वयं विधेयक लाकर अपना वेतन बढ़ा लेते हैं, जिससे आम जनता में आलोचना होती रहती है। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने विधायकों का वेतन दोगुना करने के लिए दो विधेयक पारित किए, जबकि गुजरात सरकार ने भी वेतन वृद्धि को मंजूरी दी है। दिल्ली विधानसभा ने अपने विधायकों के वेतन और भत्तों की समीक्षा के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
दिलचस्प बात यह है कि देश के शीर्ष नौकरशाहों और राजपत्रित अधिकारियों का मूल वेतन सांसदों-विधायकों से कहीं अधिक है। कैबिनेट सचिव का वेतन ढाई लाख रुपए मासिक है, जबकि केंद्रीय सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों का मूल वेतन सवा दो लाख रुपए मासिक है। कुछ नियामक संस्थाओं के प्रमुखों का वेतन तो चार लाख रुपए से भी अधिक है।
देश में आम आदमी की आय से कई गुना अधिक है, सांसदों और विधायकों का वेतन





