केंद्र सरकार ने 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया था। विपक्ष के विरोध के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। जेपीसी ने विभिन्न हितधारकों और मुस्लिम संगठनों से कई बैठकें कीं और दिल्ली से बाहर जाकर वक्फ संपत्तियों का निरीक्षण किया। साथ ही, राज्यों के वक्फ बोर्ड अधिकारियों से मुलाकात भी की। इस दौरान समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया और बजट सत्र के दूसरे चरण तक रिपोर्ट पेश करने की समय सीमा दी गई। जेपीसी ने अल्पसंख्यक मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा सुझाए गए 40 संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रमुख प्रावधान और बदलाव:
- गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे शामिल
• वक्फ बोर्ड में अब गैर मुस्लिम सदस्य भी नियुक्त किए जा सकेंगे।
• इस्लाम धर्म का एक जानकार सदस्य होना आवश्यक रहेगा।
• वक्फ बोर्ड और परिषद में कम से कम दो महिला सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। - संपत्ति के सत्यापन पर ज़ोर
• वक्फ संपत्ति घोषित करने से पहले पूर्ण सत्यापन जरूरी होगा।
• ज़िला कलेक्टर संपत्तियों का सर्वे करेगा और स्वामित्व सुनिश्चित करेगा। - निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी
• निर्णय लेने की प्रक्रिया में गैर-मुस्लिम, विभिन्न मुस्लिम समुदायों (पसमांदा, पिछड़े मुसलमान) और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। - दान की शर्तें
• जो व्यक्ति वक्फ को संपत्ति दान करेगा, वह कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का अनुयायी होना चाहिए। - सरकारी संपत्तियां वक्फ नहीं होंगी
• अब किसी भी सरकारी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा। इस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। - महिलाओं को संपत्ति का अधिकार
• परिवार वक्फ (वक्फ-अल-औलाद) में मुस्लिम महिलाओं को भी संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा।
• विधवा, तलाकशुदा और अनाथ महिलाओं को भी पारिवारिक संपत्ति में हिस्सा मिलेगा। - सत्यापित वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहेंगी
• जो संपत्तियां विधिसम्मत रूप से वक्फ हैं और सत्यापन में सही पाई जाती हैं, उन्हें वक्फ संपत्ति माना जाएगा, बशर्ते वे विवादित या सरकारी संपत्ति न हों। - नए कानून और प्रबंधन
• वक्फ संपत्तियों पर अब परिसीमा अधिनियम 1963 लागू होगा, जिससे लंबे समय से चल रहे विवाद सुलझ सकेंगे।
• पूरे गांव या किसी भी संपत्ति को मनमाने ढंग से वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा।
• जिन वक्फ संस्थाओं की वार्षिक आमदनी एक लाख रुपये से अधिक है, उन्हें हर साल ऑडिट कराना होगा।
• मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर केंद्रीय वक्फ पोर्टल पर अपनी संपत्तियों का विवरण देना अनिवार्य होगा।
• मुसलमानों द्वारा बनाए गए निजी ट्रस्ट, भले ही वे किसी कानून के तहत हों, उन्हें वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।





