राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने विपक्ष के कई सुझावों को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि जब विधेयक का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया था और अब जो विधेयक पारित किया जा रहा है, उसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह मांग कि ट्रिब्यूनल में तीन सदस्य होने चाहिए, उसे भी स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया होता, तो यह विधेयक आज कुछ और ही रूप में होता।
राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर आधी रात तक बहस चली और 12 घंटे से भी अधिक लंबी चर्चा के बाद रिजिजू ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों को विधेयक में शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इस विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तव में यह विधेयक करोड़ों मुसलमानों के हित में है।
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार किसी को डराने का काम नहीं कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे खुद ही भय का माहौल बनाकर मुस्लिम समाज को मुख्यधारा से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि भविष्य में मुसलमानों को गुमराह न किया जाए क्योंकि यह विधेयक उनके लिए लाभकारी सिद्ध होगा। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि एक बार किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाए, तो उसे बदला नहीं जा सकता और यह पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से पूरी की जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार वक्फ संपत्तियों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करती।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए रिजिजू ने यह सवाल उठाया कि वक्फ बोर्ड जैसे वैधानिक निकाय में केवल मुसलमानों को ही क्यों शामिल किया जाए? अगर किसी संपत्ति को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद हो, तो उसे कैसे सुलझाया जाएगा? उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहिए ताकि उसमें सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व हो सके, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक दान से संबंधित मामलों में गैर-इस्लामिक सदस्यों को शामिल नहीं किया जाएगा। रिजिजू ने यह भी बताया कि विधेयक में अपील का अधिकार शामिल किया गया है। अगर कोई व्यक्ति ट्रिब्यूनल में न्याय नहीं पा सके, तो वह अदालत में अपील कर सकता है। उन्होंने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का नाम अब ‘उम्मीद’ (एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास) विधेयक होगा।
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के चलते 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपीए सरकार ने 123 महत्वपूर्ण संपत्तियों को गैर-अधिसूचित कर दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंप दिया, जबकि वे संपत्तियाँ आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की थीं। गौरतलब है कि यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और बीती रात इसे लोकसभा में पारित किया गया। यह विधेयक 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करके भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, तकनीक-संपन्न और कुशल बनाने का प्रयास करता है।
वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के हित में – किरेन रिजिजू






