वक्फ संशोधन विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद आखिरकार यह राज्यसभा में पारित हो गया। बिल के पक्ष में 128 वोट मिले जबकि विरोध में 95 वोट पड़े। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इस पर करीब 13 घंटे लंबी बहस चली। इससे पहले बुधवार को यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, जहां इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट डाले गए।
राज्यसभा में बिल पेश करते हुए रिजिजू ने कहा कि वक्फ से जुड़ी जितनी गहराई से जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने की है, उतनी किसी और समिति ने नहीं की। चर्चा के दौरान रिजिजू, अमित शाह और दिग्विजय सिंह के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
सदन में कई नेताओं ने अपनी राय रखी जिनमें किरेन रिजिजू, जे.पी. नड्डा, मल्लिकार्जुन खड़गे, अभिषेक मनु सिंघवी, सैयद नसीर हुसैन, राधा मोहन दास अग्रवाल, संजय सिंह, सुधांशु त्रिवेदी और नदीमुल हक शामिल थे।
रिजिजू ने आरोप लगाया कि 2014 के आम चुनावों से ठीक पहले यूपीए सरकार ने आदर्श आचार संहिता लागू होने से कुछ समय पहले 123 अहम संपत्तियों को गैर-अधिसूचित कर दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंप दिया, जबकि ये संपत्तियां आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन थीं।
बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। उन्होंने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि वक्फ बोर्डों से व्यापक चर्चा के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि सरकार खुद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करती है और फिर विपक्ष पर वही आरोप लगाती है। उन्होंने कहा कि बिल झूठे तथ्यों पर आधारित है और पिछले 6 महीनों से गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
जनता दल (एस) के वरिष्ठ नेता एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि सरकार ने ये विधेयक एक नेक मकसद से लाया है, लेकिन ध्यान रखा जाना चाहिए कि दान में मिली वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो।
टीएमसी सांसद नदीमुल हक ने बिल की उस शर्त पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि कोई व्यक्ति तभी वक्फ बना सकता है जब वह कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो। उन्होंने पूछा कि इसका प्रमाण कौन देगा? उन्होंने इसे अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस विधेयक पर पुनर्विचार जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुसलमान भी इस मिट्टी के बेटे हैं और उन्हें पराया समझने की मानसिकता देश को नुकसान पहुंचा सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वक्फ विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है। यह कानून नहीं बल्कि एकतरफा फैसला है जिसे कानूनी भाषा में ढाला गया है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए सरकार से विधेयक वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे मुसलमानों के लिए उम्मीद बताया जा रहा है लेकिन यह वास्तव में नाउम्मीदी लाता है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश में इस विधेयक को लेकर अल्पसंख्यकों के बीच डर का माहौल बना है। अगर 1995 के कानून में सिर्फ सुधार की बात होती तो हम उसका समर्थन करते। लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ताकत के बल पर फैसले लेगी तो यह किसी के लिए भी ठीक नहीं होगा।
वक्फ संशोधन विधेयक राज्यसभा में भी पारित, अब राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी






