मणिपुर कांग्रेस ने वक्फ कानून का विरोध किया, सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती

कांग्रेस की मणिपुर इकाई भी अब वक्फ कानून के खिलाफ खुलकर सामने आ गई है। पार्टी इस कानून को कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि यह कानून संविधान का गंभीर उल्लंघन है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने बताया कि कांग्रेस की राज्य इकाई वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। उन्होंने कहा कि इस पर काम शुरू हो चुका है और पार्टी की एक टीम बुधवार तक दिल्ली रवाना होगी। वहां सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को चुनौती दी जाएगी।
इबोबी सिंह ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन मौजूदा एनडीए सरकार मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने वक्फ (संशोधन) कानून को संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि कांग्रेस इस कानून का पूरी तरह विरोध करती है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को लेकर उठाए सवाल
सिंह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या है, तो फिर सरकार क्यों नहीं बनाई जा रही? उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में विधायकों के माध्यम से सरकार का गठन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन यह दर्शाता है कि सरकार राज्य की कानून-व्यवस्था संभालने में विफल है।
तीर्थयात्रा को लेकर कुकी समुदाय से की अपील
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके सिंह ने कुकी समुदाय से अपील की कि वे थांगजिंग पहाड़ियों (चूड़ाचांदपुर जिले) में मैतेई समुदाय की वार्षिक तीर्थयात्रा के विरोध पर पुनर्विचार करें। उन्होंने कहा कि मणिपुर में सभी समुदाय – चाहे कुकी हों, नागा हों, मुस्लिम हों या मैतेई – सदियों से साथ रह रहे हैं और भविष्य में भी साथ रहना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस अवैध प्रवासियों के पक्ष में नहीं है, लेकिन स्वदेशी समुदायों को मिल-जुलकर रहना चाहिए।

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