
योगी ने कहा था- हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री बोले — कानून का पालन करना भी जानते हैं और करवाना भी
- सपा पर आरोप — लोगों को भ्रमित करने की राजनीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शंकराचार्य जैसे पद पर नियुक्ति परंपरा, मान्यता और नियमों से होती है, कोई भी व्यक्ति स्वयं को यह उपाधि नहीं दे सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे शंकराचार्य पद व्यवस्था से तय होता है, वैसे ही मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है और सभी को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना होता है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी पद की प्रतिष्ठा स्थापित परंपराओं से निर्धारित होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति स्वयं को मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर प्रदेश में नहीं घूम सकता, क्योंकि व्यवस्था और प्रणाली का पालन सभी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य पद अत्यंत सम्मानित है, जिसकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने देश की चार दिशाओं में चार पीठों के माध्यम से की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। उन्होंने कहा कि इन पीठों की परंपरा आज भी विद्वत परिषद द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित होती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सदन स्वयं नियमों से चलता है और कानून सबके लिए समान है। “मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है,” उन्होंने कहा।
माघ मेले का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने बताया कि माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन लगभग 4.50 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति निकास द्वार से प्रवेश करने का प्रयास करे तो इससे भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है और लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज की गई। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि लोगों को गुमराह करने के बजाय देशहित में सोचें।
आस्था और विकास साथ-साथ
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा ने अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम तथा मथुरा-वृंदावन के विकास का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पुनर्जागरण मॉडल में आस्था और विकास दोनों समान रूप से शामिल हैं और बड़े धार्मिक आयोजनों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भी विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
सियासी प्रतिक्रिया
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्नाव में पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री को “योगी” लिखने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल वस्त्र धारण करने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता।






