
अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन वार्ता विफल होने की स्थिति में वैकल्पिक रणनीति भी तैयार रखी जा रही है। दूसरे विमानवाहक पोत की तैनाती से इलाके में रणनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के प्रयासों के बीच उन्होंने मध्य पूर्व में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने का निर्णय लिया है। उनका कहना था कि यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो इस अतिरिक्त तैनाती की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन “सबसे बेहतर परिणाम” हो सकता है, जबकि अमेरिकी प्रशासन तेहरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
ये बयान उन्होंने सैनिकों से मुलाकात के तुरंत बाद फोर्ट ब्रैग में दिए, जो नॉर्थ कैरोलिना में स्थित है। इससे पहले उन्होंने पुष्टि की थी कि संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तहत मध्य पूर्व में दूसरा विमानवाहक पोत समूह भेजा जा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को कैरेबियन सागर से मध्य पूर्व रवाना किया जा रहा है, जो पहले से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ मौजूद गाइडेड-मिसाइल विध्वंसकों से जुड़ जाएगा। लिंकन पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय है।
रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस से पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो हालात “बेहद पीड़ादायक” हो सकते हैं। हाल ही में ओमान में अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता भी हुई थी। इस बीच खाड़ी क्षेत्र के देशों ने आगाह किया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है।
ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की 40वें दिन की शोक सभाएं शुरू होने वाली हैं, जिससे सरकार पर घरेलू दबाव भी बढ़ रहा है। हाल में अमेरिकी बलों ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया था जो लिंकन के पास पहुंच गया था, जबकि उसी दिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी झंडे वाले जहाज को रोकने की कोशिश की थी।
यूएसएस फोर्ड को पिछले वर्ष अक्टूबर में भूमध्य सागर से कैरेबियन भेजा गया था, जहां वह वेनेजुएला से जुड़े संभावित अभियान की तैयारी का हिस्सा था। अब इसे दोबारा तैनात किया जा रहा है। अमेरिकी दक्षिणी कमान ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव के बावजूद पश्चिमी गोलार्ध में उसकी परिचालन क्षमता प्रभावित नहीं होगी।
इससे पहले ट्रंप ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लंबी बातचीत की थी। नेतन्याहू चाहते हैं कि किसी भी समझौते में ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे और हमास तथा हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देना बंद करे।






