ग्वालियर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को ग्वालियर पहुंचने पर कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद का एक धर्म है, और आज की स्थिति में वह धर्म इस्लाम माना जा रहा है। पहलगाम हमले के लिए अभी तक कोई स्पष्ट जिम्मेदार तय नहीं हुआ है, फिर भी घटना के कुछ ही मिनटों बाद पाकिस्तान का नाम लेना आपदा में अवसर खोजने जैसा है। केवल पाकिस्तान पर चार फैसले लेने से कुछ नहीं बदलेगा।
कलमा न पढ़ने पर धर्म पूछकर गोली मारी गई
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलवाने जा रहे थे, ने आगे कहा कि पहलगाम में जिन लोगों ने कलमा नहीं पढ़ा, उनसे उनका धर्म पूछकर गोली मार दी गई। इसके बाद ‘कश्मीरियत’, ‘जम्हूरियत’ और ‘इंसानियत’ जैसे शब्द बार-बार बोले जा रहे हैं। एक कश्मीरी गाइड ने अपनी जान देकर कश्मीरियत को साबित किया, लेकिन जम्हूरियत तो अब रही ही नहीं। सरकार द्वारा दावा किया गया था कि धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में अमन और व्यवस्था आ गई है। लेकिन अब जब ऐसी बड़ी घटना हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कोई भी आगे नहीं आ रहा।
पुलवामा की जिम्मेदारी भी आज तक तय नहीं हुई
स्वामीजी ने कहा कि पुलवामा में मारे गए सैनिकों की जिम्मेदारी आज तक तय नहीं हो पाई। इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद आम लोगों को मारा जा रहा है। ऐसे समय में राजनीतिक लाभ उठाना कहां तक उचित है? यह घटना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे देखकर हमें गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है। जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यह भी पता लगाना जरूरी है कि जिम्मेदार कौन हैं। जो लोग इस राष्ट्र में रहते हैं, उनका हित सनातन धर्म में है। अब सनातन धर्म के अनुयायियों को एक नया मार्ग तलाशना होगा। मेरे अनुसार, इस देश में सनातनी विचारधारा की राजनीति की आवश्यकता है।






