अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह तथ्य उल्लेखनीय है कि अल-शरा कभी अल-कायदा का आतंकी रह चुका है। साल 2006 से 2011 तक वह अमेरिका की जेल में कैद था और उस पर अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर (लगभग 85 करोड़ रुपये) का इनाम भी घोषित किया था।
ट्रंप का मिडिल ईस्ट दौरा
डोनाल्ड ट्रंप 13 से 16 मई के बीच मिडिल ईस्ट के देशों के दौरे पर हैं, जो उनके दूसरे कार्यकाल की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा है। इस दौरे की शुरुआत उन्होंने सऊदी अरब से की, जिसके बाद वह कतर पहुँचे। इन देशों के साथ उन्होंने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मंगलवार को सऊदी अरब में एक निवेश मंच को संबोधित करते हुए ट्रंप ने सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। इसी के अगले दिन उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति से मुलाकात की।
अहमद अल-शरा: एक आतंकी से राष्ट्रपति तक का सफर
• शुरुआती जीवन: अहमद अल-शरा का जन्म 29 अक्टूबर 1982 को रियाद, सऊदी अरब में हुआ था। वह एक सीरियाई सुन्नी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं और बाद में दमिश्क में आकर बसे।
• आतंकी जीवन की शुरुआत: 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले से पहले अल-शरा ने अल-कायदा जॉइन किया। 2006 में अमेरिकी सेना ने उसे इराक में गिरफ्तार किया और वह 2011 तक अमेरिकी जेल में रहा।
• सीरियाई गृहयुद्ध में भूमिका: जेल से रिहा होने के बाद उसने 2012 में अल-नुसरा फ्रंट का गठन किया, जो बाद में इदलिब प्रांत में मजबूत हुआ। जब ISIS ने अल-नुसरा को अपने साथ मिलाने की कोशिश की, तो दोनों संगठनों में संघर्ष हुआ, लेकिन अल-शरा ने अपने गुट को स्वतंत्र बनाए रखा।
• मुख्यधारा में बदलाव: 2016 में अल-शरा ने अल-कायदा से संबंध तोड़कर एक उदार और सीरियाई-केंद्रित नेतृत्व की दिशा में कदम बढ़ाया। 2017 में उसने हयात तहरीर अल-शाम (HTS) का गठन किया और असद शासन के खिलाफ विद्रोह तेज कर दिया।
• तख्तापलट और राष्ट्रपति पद: नवंबर 2024 में 11-दिवसीय आक्रमण के दौरान HTS ने कई शहरों पर कब्जा किया। 8 दिसंबर को राष्ट्रपति बशर अल-असद रूस भाग गए और HTS ने सत्ता अपने हाथ में ले ली। इसके बाद, अल-शरा को 29 जनवरी 2025 को सीरिया का आधिकारिक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। अब वह देश की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
यह मुलाकात वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा परिदृश्य के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि एक समय आतंकवाद का चेहरा रहा व्यक्ति अब एक संप्रभु देश का नेतृत्व कर रहा है और विश्व नेताओं से मिल रहा है।





