कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- “वक्फ अल्लाह को दिया गया एक दान है…”

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों पर अवैध रूप से नियंत्रण स्थापित करने के लिए बनाया गया है। वक्फ अधिनियम को इस प्रकार रचा गया है कि इसके तहत बिना किसी उचित प्रक्रिया के वक्फ की संपत्ति जब्त की जा सकती है।

“वक्फ अल्लाह को समर्पित दान है”
कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ एक बार अल्लाह के नाम पर कर दी गई संपत्ति होती है, तो वह हमेशा के लिए वक्फ की संपत्ति बन जाती है। ऐसी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।

“कानून का उद्देश्य है वक्फ भूमि पर अधिकार जमाना”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कानून मूल रूप से वक्फ की जमीनों को कब्जे में लेने के इरादे से बनाया गया है, और इसमें उचित कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की गई है, जिससे यह असंवैधानिक बनता है।

“मुसलमान होने का प्रमाण देना होगा – यह अनुचित है”
सिब्बल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मृत्युशैया पर है और वक्फ घोषित करना चाहता है, तो उसे यह प्रमाणित करना होगा कि वह मुस्लिम है। यह प्रावधान संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

“सरकारी अधिकारी खुद ही निर्णयकर्ता बनेंगे
सिब्बल ने यह भी कहा कि नए कानून के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति या पंचायत शिकायत दर्ज कर सकती है और संपत्ति को वक्फ न मानने की मांग कर सकती है। इसमें निर्णय लेने का अधिकार सरकारी अधिकारियों को दिया गया है, जो स्वयं ही मामले में न्यायाधीश की भूमिका निभाएंगे और उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछा जा सकेगा।

“मस्जिदों में मंदिरों जैसा बड़ा चंदा नहीं आता”
सिब्बल ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिरों में 2000-3000 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है, लेकिन मस्जिदों में ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि वक्फ बाय यूजर की अवधारणा इसी अंतर को स्पष्ट करती है।

संभल की मस्जिद का उल्लेख
कपिल सिब्बल ने एएसआई विवाद में संभल की जामा मस्जिद का भी जिक्र किया और कहा कि 1954 में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया था, लेकिन जिन संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हुआ, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह एक उल्लेखनीय तथ्य है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading