असम पुलिस ने इस सप्ताह के अंत में एक व्यापक दस्तावेज सत्यापन अभियान शुरू किया, जिसके तहत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुवाहाटी, गोलाघाट, धुबरी, बारपेटा और कछार जिलों से शनिवार और रविवार को कम से कम 50 लोगों को उठाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई दस्तावेजों की जांच के लिए की जा रही है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कुल कितने लोगों को हिरासत में लिया गया है।
हिरासत में लिए गए लोगों में बड़ी संख्या बंगाली मूल के मुस्लिम समुदाय से है, जिससे समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल फैल गया है। खास तौर पर यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया है जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि वे बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों की नागरिकता के दावों की 30 दिनों के भीतर पुष्टि करें। यदि इस अवधि में दस्तावेजों की पुष्टि नहीं होती, तो गृह मंत्रालय ने ऐसे लोगों को देश से निष्कासित करने का निर्देश दिया है।
इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन ने इसे “उत्पीड़न” बताया है। संगठन के अध्यक्ष रिजौल करीम सरकार ने कहा, “असम में विदेशी नागरिकों की पहचान की एक व्यवस्थित प्रक्रिया मौजूद है, हमारे पास सीमा पुलिस, विदेशी न्यायाधिकरण हैं, और इनके निर्णयों के खिलाफ उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। लेकिन जो कुछ अब किया जा रहा है, वह सिर्फ डर और दहशत का माहौल बनाने की कोशिश है। अगर वास्तव में कोई बांग्लादेशी है, तो सरकार को बांग्लादेश के साथ समुचित समझौता कर कानूनी ढंग से उन्हें वापस भेजना चाहिए।”
असम पुलिस ने चलाया दस्तावेज सत्यापन अभियान, कई लोगों को हिरासत में लिया






