देश के कौन-कौन से राज्य ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा लोग आत्महत्या कर रहे हैं?
देश में आत्महत्या की दर लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन करीब 468 लोग अपनी जान दे रहे हैं, जिनमें 72% पुरुष होते हैं।
हर साल मई महीने को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है, ‘In Every Story, There’s Strength’
पुरुष और महिलाएं क्यों आत्महत्या करते हैं? क्या उनके कारण समान हैं या अलग-अलग? और आत्महत्या के विचार आने पर उनसे कैसे निपटा जाए?
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा हैं। जबकि सबसे अधिक आत्महत्या की दर वाले राज्य सिक्किम, अंडमान-निकोबार और पुडुचेरी हैं।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक वकील ने इंदिरा डैम में कूदकर खुदकुशी कर ली। इंदौर में एक बैंक की सेल्स एग्जीक्यूटिव ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या की। कोटा में 25 वर्षीय छात्र ने अपने कमरे में पंखे से लटककर जान दे दी। दिल्ली में एक व्यापारी ने अपने परिवार समेत जहरीला पदार्थ पीकर खुदकुशी कर ली। ऐसी खबरें रोजाना सुनने और पढ़ने को मिलती हैं। देश में आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक हैं। हर दिन 468 से अधिक लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जिनमें 72% पुरुष हैं।
खास तौर पर इस साल पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में 1,71,000 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की, जो देश के लिए रिकॉर्ड है। इसी वजह से भारत दुनिया में आत्महत्या के मामलों में सबसे ऊपर है। आत्महत्या करने वालों में 1,22,724 पुरुष और 48,286 महिलाएं शामिल थीं। एनसीआरबी की रिपोर्ट ने पुरुषों की भावनात्मक अनदेखी और बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर चिंता जताई है।
प्रमुख सवाल हैं: देश के कौन से राज्य हैं जहां सबसे ज्यादा लोग आत्महत्या कर रहे हैं? पुरुष और महिलाएं क्यों आत्महत्या करते हैं? क्या उनके कारण समान हैं या अलग? आत्महत्या के विचार आने पर क्या किया जाए? और अपने आस-पास के लोगों को कैसे पहचाना और बचाया जाए?
आत्महत्या के मामले सबसे अधिक इन राज्यों में:
• महाराष्ट्र: 22,746
• तमिलनाडु: 19,834
• मध्य प्रदेश: 15,386
• कर्नाटक: 13,606
• पश्चिम बंगाल: 12,669
• केरल: 10,162
• तेलंगाना: 9,980
• गुजरात: 9,002
• आंध्र प्रदेश: 8,908
• छत्तीसगढ़: 8,446
• उत्तर प्रदेश: 8,176
आत्महत्या के मुख्य कारण क्या हैं?
एनसीआरबी के अनुसार, अधिकतर लोग पारिवारिक समस्याएं (31.7%) और गंभीर बीमारियों (18.4%) के कारण जान दे रहे हैं। इसके अलावा नशे की लत, शादी-संबंधी झगड़े, प्रेम संबंधों में टूट-फूट, आर्थिक नुकसान, बेरोजगारी, हिंसा, ब्लैकमेलिंग, करियर संबंधी परेशानियां, मानसिक विकार, अकेलापन और संपत्ति विवाद भी आत्महत्या के कारण हैं।
पुरुष और महिलाओं के कारण अलग हैं:
• महिलाएं आमतौर पर पारिवारिक समस्याओं जैसे दहेज की मांग, बार-बार शादी टूटना, सामाजिक प्रतिष्ठा का डर, घरेलू हिंसा जैसी परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या करती हैं।
• पुरुष नौकरी छूटने, व्यापार में नुकसान, कर्ज में डूबने, संपत्ति विवाद, प्यार में असफलता, परीक्षा या इंटरव्यू में असफलता जैसी वजहों से आत्महत्या करते हैं।
पुरुषों में आत्महत्या की संख्या अधिक क्यों है?
डॉक्टर बताते हैं कि पुरुषों की परवरिश इस तरह की जाती है कि वे अपनी कमजोरियां दूसरों के सामने न दिखाएं और हर हाल में मजबूत बने रहें। इस वजह से वे अपनी मानसिक परेशानियों को अपने परिवार या दोस्तों के साथ साझा नहीं कर पाते और अंततः आत्महत्या कर लेते हैं। पुरुषों के खिलाफ बढ़ते झूठे आरोप, भावनात्मक और कानूनी उत्पीड़न भी उनकी मानसिक स्थिति को और खराब करते हैं।
हिंसा के शिकार पुरुष:
हाल ही में हरियाणा में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 52.4% शादीशुदा पुरुष लिंग आधारित हिंसा का शिकार हुए हैं, लेकिन उन्हें कानूनी या मनोवैज्ञानिक मदद नहीं मिली। समाज पुरुषों के दर्द को अनदेखा कर रहा है। यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है और आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाती है।
जिंदगी बचाने के लिए क्या करें?
डॉक्टर कहते हैं कि पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य को स्वीकार करना और सहयोग देना बहुत जरूरी है। घर और कार्यस्थल पर ऐसा माहौल बनाएं जहां लोग अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कर सकें। पुरुषों को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी और समाज को उनकी बात सुननी होगी।
जब नकारात्मक विचार आएं तो करें:
• परिवार, दोस्त या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
• मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करें।
• 24×7 हेल्पलाइन की मदद लें।
• नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें।
यदि आप स्वयं या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, डिप्रेशन, चिंता या आत्महत्या के विचार से जूझ रहा है तो तुरंत मनोवैज्ञानिक परामर्श लें।





