
इस वर्ष योग दिवस की थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” रखी गई। विशाखापत्तनम में आरके बीच से भोगापुरम तक 26 किलोमीटर क्षेत्र में 3.19 लाख लोगों ने एक साथ योग किया। इस आयोजन के लिए 326 विशेष कम्पार्टमेंट, 3.32 लाख टी-शर्ट और 5 लाख योग मैट की व्यवस्था की गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने तीन लाख से अधिक लोगों के साथ योग किया और योग को “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” का वैश्विक संकल्प बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि योग न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी जोड़ता है, और यह सभी के लिए है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि, उम्र या शारीरिक क्षमता कुछ भी हो। मोदी ने कहा कि विश्व में इस समय तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, ऐसे में योग मानवता को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अनुरोध किया कि इस योग दिवस को “योग 2.0” की शुरुआत मानें, जहां आंतरिक शांति को वैश्विक नीति का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने इसे वह ‘विराम बटन’ बताया जिसकी आज मानवता को सबसे अधिक जरूरत है, ताकि दुनिया संतुलन में रह सके और फिर से पूर्णता की ओर बढ़ सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि योग सीमाओं से परे सभी को जोड़ता है। यह स्वास्थ्य, सौहार्द और चेतना का उपहार है। उन्होंने विशाखापत्तनम को प्रकृति और प्रगति का संगम बताते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को इस विशाल आयोजन के लिए बधाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराने की पहल को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उस प्रस्ताव को रिकॉर्ड समय में 175 देशों का समर्थन मिला, यह वैश्विक एकता और मानवता के हित में एक ऐतिहासिक कदम था।
उन्होंने कहा कि आज योग ओपेरा हाउस की सीढ़ियों से लेकर एवरेस्ट की चोटियों और समुद्र की लहरों तक पहुंच चुका है। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक समर्पित प्रयास है, जो विश्वभर में स्वास्थ्य और शांति का प्रतीक बन गया है। उन्होंने पूरी दुनिया को इस 11वें योग दिवस की शुभकामनाएं दीं और बताया कि योग ने आज सचमुच पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधा है।
दिल्ली में आयोजित योग समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि यह आत्मचिंतन और आंतरिक चेतना से जुड़ने का एक मार्ग है। यह एक गहरा मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच एकता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के अंत में कहा आइए, हम सब मिलकर योग को जन आंदोलन बनाएं, एक ऐसा आंदोलन जो दुनिया को शांति, स्वास्थ्य और सामंजस्य की ओर ले जाए।






