दलाई लामा 6 जुलाई 2025 को 90 वर्ष के हो जाएंगे। इसी दिन वे 15वें दलाई लामा की घोषणा कर सकते हैं। वे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनका “अगला जन्म” चीन के बाहर होगा। उनकी आत्मकथा वॉइस फॉर द वॉइसलैस (मार्च 2025) में यह उल्लेख है कि उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया उनके 90वें जन्मदिन के आसपास सार्वजनिक की जाएगी। यह जिम्मेदारी धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती संसद और गदेन फोड्रांग फाउंडेशन को सौंपी गई है। तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार दलाई लामा की आत्मा अगली देह में पुनर्जन्म लेती है। मौजूदा 14वें दलाई लामा, ल्हामो धोंडुप ने दो साल की उम्र में अपने पूर्ववर्ती की वस्तुएं पहचान कर यह पद प्राप्त किया था। खोजी दलों ने पूर्व संकेतों और व्यक्तिगत पहचान के आधार पर उनका चयन किया। अब वही धार्मिक पद्धति फिर अपनाई जाएगी।
सन् 1959 से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित दलाई लामा और एक लाख से ज्यादा तिब्बती शरणार्थी भारत को नैतिक और कूटनीतिक बढ़त देते आए हैं। वर्ष 2024 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक कानून पारित किया, जिसमें चीन की दखलअंदाजी को अवैध करार देते हुए तिब्बत को ज्यादा स्वायत्तता देने का समर्थन किया गया। दूसरी ओर चीन 1793 की गोल्डन अर्न प्रणाली के तहत उत्तराधिकारी को चीन में ही घोषित करने पर अड़ा हुआ है। दलाई लामा स्पष्ट कह चुके हैं कि “जो सत्ता धर्म में विश्वास ही नहीं रखती, उसे मेरी आत्मा तय करने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने तिब्बतियों को चेतावनी दी है कि वे बीजिंग द्वारा प्रस्तावित किसी भी प्रत्याशी को न स्वीकारें।
अब मुख्यत: दो परिदृश्य उभर कर सामने आ सकते हैं:
- धर्मशाला समर्थित दलाई लामा, जिनका चयन पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया से होगा और जिन्हें भारत, अमेरिका और पश्चिमी लोकतंत्रों का समर्थन प्राप्त रहेगा।
- चीन के भीतर घोषित दलाई लामा, जिन्हें तिब्बत में सशस्त्र सुरक्षा में रखा जाएगा, लेकिन उनकी अंतरराष्ट्रीय मान्यता संदिग्ध रहेगी।




