
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) द्वारा 12,261 कर्मचारियों की संभावित छंटनी को लेकर आईटी मंत्रालय गंभीर है और पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है। मंत्रालय ने इस मसले को लेकर कंपनी से संपर्क में रहने की पुष्टि की है और कहा है कि वह इसके मूल कारणों की जांच करेगा। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि टीसीएस भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी है, और यह छंटनी उसके वैश्विक कार्यबल के लगभग दो प्रतिशत को प्रभावित करेगी, जिसका सीधा असर खासकर मध्यम और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों पर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इस फैसले से उत्पन्न परिस्थितियों की गहराई से निगरानी कर रहा है और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित है। मंत्रालय का मानना है कि रोजगार वृद्धि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके तहत रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं, कौशल विकास और पुनः प्रशिक्षण जैसी पहलों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा रहा है।
टीसीएस ने 30 जून 2025 तक 6,13,069 कर्मचारियों की संख्या दर्ज की है। अप्रैल से जून 2025 की तिमाही में कंपनी ने 5,000 नए कर्मचारी जोड़े हैं। कंपनी ने एक बयान में स्पष्ट किया है कि यह छंटनी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संगठन को तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।
टीसीएस का कहना है कि वह एक “भविष्य के लिए तैयार संगठन” बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए कंपनी कई रणनीतिक क्षेत्रों में कार्य कर रही है, जिनमें नई तकनीकों में निवेश, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बड़े पैमाने पर उपयोग, नए बाजारों में विस्तार, साझेदारियों को मजबूत करना, और कार्यबल मॉडल का पुनर्गठन शामिल हैं।






