सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में जारी विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग को अहम सुझाव दिया। अदालत ने आयोग से दोबारा आग्रह किया कि वह इस प्रक्रिया में आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) को पहचान के वैध दस्तावेजों के रूप में मानने पर विचार करे। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें यह सवाल उठाया गया था कि मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया में किन दस्तावेजों को मान्यता दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि वे यह तय करें कि अपनी दलीलें रखने में कितना समय लगेगा। इसके बाद मंगलवार को अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
बिहार में मतदाता सूची के इस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (उद्धव गुट), समाजवादी पार्टी, जेएमएम, सीपीआई और सीपीआई (एमएल) सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती दी है। इन याचिकाओं में राजद सांसद मनोज झा और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की अलग-अलग याचिकाएं शामिल हैं। इनके अलावा कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, एनसीपी की सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी. राजा, सपा के हरिंदर सिंह मलिक, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, जेएमएम के सरफराज अहमद और सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इन सभी नेताओं ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के आदेश को असंवैधानिक बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की है।
बिहार चुनाव: आधार और वोटर आईडी को पहचान पत्र के रूप में विचार करे चुनाव आयोग- सुप्रीम कोर्ट





