रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें 17,000 करोड़ रुपये के कर्ज घोटाले के मामले में 5 अगस्त को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया है। इससे पहले ईडी ने अनिल अंबानी से जुड़े कई व्यवसायिक परिसरों पर छापेमारी की थी।
ईडी की 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी
ईडी ने इस मामले में 35 से अधिक स्थानों पर छापे मारे थे, जिसमें उसे कई अहम दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि रिलायंस ग्रुप की विभिन्न कंपनियों ने यस बैंक से बिना उचित गारंटी के लोन लिए और इन पैसों को शेल कंपनियों के जरिए अन्य कारोबारों में निवेश कर दिया गया।
लोन मंजूरी के बदले रिश्वत की आशंका
सीबीआई ने यस बैंक से जुड़े मामले में पहले ही दो एफआईआर दर्ज की थीं, जिनके आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि लोन मंजूरी से ठीक पहले कुछ निजी कंपनियों को भुगतान किए गए, जिससे रिश्वत दिए जाने की आशंका जताई जा रही है।
रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सफाई
इस पूरे मामले में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका रिलायंस कम्युनिकेशन और आरएचएएफएल से कोई वित्तीय संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी इन कंपनियों के बोर्ड में शामिल नहीं हैं। हालांकि, एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशन और इसके प्रमुख अनिल अंबानी को “फ्रॉड” घोषित कर सीबीआई से शिकायत दर्ज कराई है।
संसद में केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि भारतीय स्टेट बैंक ने अनिल डी. अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशन को धोखाधड़ी करने वाली श्रेणी में रखा है। यह निर्णय आरबीआई की फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट गाइडलाइंस और एसबीआई की नीति के तहत लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीआई में इस संबंध में जल्द ही शिकायत दर्ज कराई जाएगी।






