धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान को पुलिस ने एक बार फिर रिमांड पर लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं। पता चला है कि गिरोह अपने सदस्यों तक धनराशि पहुंचाने के लिए बैंक खातों का उपयोग नहीं करता था, बल्कि पूरा नेटवर्क हवाला के जरिए संचालित हो रहा था।
गिरोह के एजेंट छह राज्यों में सक्रिय थे और वे संबंधित लोगों तक नकद रकम पहुंचाते थे। पुलिस को इस गिरोह से जुड़े कई नाम मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अब्दुल रहमान को शनिवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उसकी चार दिन की रिमांड मंजूर की गई। वह अब 5 अगस्त तक पुलिस हिरासत में रहेगा। इससे पहले, 18 जुलाई को पुलिस ने कोलकाता के तपसिया इलाके से दो बहनों को बरामद किया था। साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों से 10 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। इनमें दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी अब्दुल रहमान भी शामिल था, जो पहले से जेल में बंद कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था। गिरोह के प्रमुख सदस्यों में गोवा की एसबी कृष्णा उर्फ आयशा और आगरा का रहमान कुरैशी भी थे।
पुलिस ने तीनों से अलग-अलग रिमांड पर पूछताछ की, जिसमें कई अहम जानकारियाँ मिलीं। यह भी सामने आया कि गिरोह को पाकिस्तान सहित अन्य देशों से भी फंडिंग मिल रही थी। ये रकम सीधे बैंक खातों में नहीं, बल्कि हवाला एजेंटों के ज़रिए धर्मांतरण करवाने वालों तक पहुंचाई जाती थी। अब तक पुलिस को 10 से अधिक बैंक खातों की जानकारी मिल चुकी है। साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सक्रिय हवाला एजेंटों की पहचान भी की जा रही है। अब्दुल रहमान से रिमांड के दौरान पुलिस इन सभी एजेंटों की विस्तृत जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी, ताकि इस अवैध नेटवर्क पर शिकंजा कसा जा सके।
लेनदेन की कड़ी निगरानी में जुटी पुलिस
पुलिस ने गिरोह के लिए धन प्रेषण का काम करने वाले गोवा की आयशा और आगरा के सराय ख्वाजा निवासी रहमान कुरैशी को गिरफ्तार किया था। संदेह है कि ये दोनों ही गिरोह के लिए धन पहुंचाने का काम करते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि रहमान कुरैशी ने फलस्तीन के लिए भी फंड इकट्ठा किया था।






