केंद्र सरकार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दी गई ज़ेड श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा वापस ले ली है। अब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई है। यह सुरक्षा उन्हें हाल ही में हुए हमले के बाद दी गई थी।
20 अगस्त की सुबह सिविल लाइंस स्थित सीएम कैंप कार्यालय में ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला किया गया था। इस हमले का आरोपी राजेश भाई खिमजी भाई सकरिया एक कुख्यात अपराधी है। पुलिस जांच में पता चला कि वर्ष 2017 में उसने मामूली विवाद में एक युवक पर तलवार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था और पास में रखी थपकी से उसे बुरी तरह पीटा था। साल 2021 में उसे तड़ीपार किया गया था। उसके खिलाफ राजकोट के भक्ति नगर थाने में मारपीट, हमला और शराब तस्करी के पाँच मामले दर्ज हैं।
पूछताछ में राजेश ने दावा किया कि वह राजकोट में 150-200 कुत्तों की देखभाल करता है और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को उसने अपनी “मेहनत का नतीजा” बताया। पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि उसने अपने परिवार को फंसाने के लिए खुद को घायल कर झूठी कॉल की थी। पहले पूछताछ में उसने कहा था कि वह अपने रिश्तेदार की पैरवी के लिए मुख्यमंत्री से मिलने आया था, लेकिन यह कहानी झूठी निकली। पुलिस रिमांड में उसने अलग-अलग कहानियां गढ़ीं और यहां तक कहा कि काल भैरव के सपने के बाद वह “कुत्ते के आदेश” पर दिल्ली आया था।
दिल्ली पुलिस की जांच
शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम राजकोट पहुँची और राजेश के दोस्तों तहसीन, जिग्नेश और चिराग समेत पाँच लोगों से पूछताछ की। इनमें से तहसीन उर्फ़ बापू को दिल्ली लाया गया। तहसीन, राजेश का 15 साल पुराना दोस्त है और उसने ही उसे दिल्ली में पैसे भेजे थे। पुलिस ने रविवार को मुख्यमंत्री पर हमले के सिलसिले में तहसीन सैयद को गिरफ्तार किया है।




