अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे हरियाणा के युवाओं ने अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अमेरिका से भेजे जाने के दौरान हाथ-पैरों में बेड़ियां डाली गई थीं और अमेरिकी सैनिक बंदूक लेकर उनके पास खड़े थे। कई सैनिक अंग्रेजी में गालियां दे रहे थे। ये सभी युवक जंगलों, नदियों, रेगिस्तानों और बेहद खतरनाक रास्तों से होते हुए डंकी रूट के जरिए छह महीने में अमेरिका पहुंचे थे।
कैथल पुलिस ने रविवार सुबह दिल्ली से इन युवाओं को लेकर कैथल पहुंचाया। उनके लौटने की खबर मिलते ही परिवारों में मायूसी फैल गई। अधिकांश युवक अपनी जमीन बेचकर या कर्ज लेकर डॉलर कमाने के सपने में अमेरिका गए थे, लेकिन अब छह-सात महीने की जेल काटने के बाद मायूस होकर खाली हाथ लौट आए हैं।
एक युवक ने बताया कि अमेरिका से भारत लौटाने वाले विमान में अमेरिकी सैनिक बंदूक लेकर सीटों के पास खड़े थे। सभी को बेड़ियों में जकड़ा गया था और सैनिक लगातार गालियां दे रहे थे। युवक अपनी आपबीती सुनाते हुए भावुक हो गया। उसने कहा कि उसने आधा से दो एकड़ तक जमीन बेचकर या उधार लेकर अमेरिका जाने का इंतजाम किया था, लेकिन अब सब कुछ खो दिया। सभी डिपोर्ट हुए लोगों ने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है।
आंकड़ों के मुताबिक, कैथल जिले के कई गांवों के करीब दो हजार युवक अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जा चुके हैं। फरवरी में भी कैथल के 12 युवक अमेरिका से डिपोर्ट किए गए थे।
डिपोर्ट होने वालों की संख्या बढ़कर 26 हुई
रविवार को 14 नए लोग पहुंचे, जिससे कुल संख्या 26 हो गई। बताया जा रहा है कि दो नवंबर को एक और विमान भारत आएगा, जिसमें और लोग डिपोर्ट होकर लौटेंगे। अब तक करीब 50 लोगों को अमेरिका से भेजा गया है। सभी का आपराधिक रिकॉर्ड जांचकर उनके परिवारों को सौंप दिया गया है।
डिपोर्ट हुए युवकों की सूची:
कैथल से: नरेश कुमार, कर्ण शर्मा, मुकेश, रितिक शर्मा, सुखबीर सिंह, अमित कुमार, अभिषेक कुमार, मोहित कुमार नाथवान, अशोक कुमार, आशीष, दमनप्रीत, प्रभात, सतनाम सिंह, डायमंड।
करनाल से: हुसन, रजतपाल, जैसंदीप, तेजेंद्र पाल, हरीश, अंकुर सिंह, विक्रम, गुरजंत सिंह, सचिन मलिक, महेंद्र सिंह, मनीष कुमार, प्रियांशु चहल, देवेंद्र सिंह, सावन, तुषार, निखिल।
जींद से: अजय, लब्जोत, नवीन।
कुरुक्षेत्र से: हैप्पी सैनी, प्रदीप कुमार, अमन कुमार, विक्रम सिंह, पारस शर्मा।
यमुनानगर से: अभिषेक, सागर, सूर्य प्रताप, हर्ष।
पानीपत व रोहतक से: पानीपत के साहिल और रोहतक के सन्नी
अंबाला से: मुलाना के हरदेश, टपरी गांव के साहिल, मुलाना निवासी तौशिक, नारायणगढ़ के खानपुर लबाना गांव के गुरसेव, जगौली गांव के हरजिंद्र सिंह।
डेढ़ साल जेल में रहा गुहला चीका निवासी
गुहला चीका के एक परिवार ने बताया कि उनका बेटा और उसकी पत्नी करीब डेढ़ साल पहले कनाडा गए थे और वहां से अमेरिका चले गए। दोनों को जेल में डाल दिया गया। पत्नी को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन युवक डेढ़ साल जेल में ही रहा। हाल ही में पुलिस ने फोन कर परिवार को उसकी वापसी की सूचना दी।
एक युवक ने जमीन बेचकर दी थी 57 लाख रुपये
एक अन्य युवक ने बताया कि उसने 9 जनवरी 2024 को दिल्ली से ब्राजील के लिए उड़ान भरी थी। उसने एजेंट को 57 लाख रुपये दिए थे, जिनमें से अधिकांश रकम एक किला ढाई कनाल जमीन बेचकर जुटाई गई थी। पनामा के जंगलों से होते हुए वह अमेरिका पहुंचा, लेकिन वहां 14 महीने जेल में रहने के बाद उसे डिपोर्ट कर दिया गया।
एजेंट के खिलाफ कोई शिकायत नहीं
डीएसपी संदीप कुमार ने बताया कि अभी तक किसी युवक ने किसी एजेंट के खिलाफ शिकायत नहीं दी है। अगर शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन युवकों की कहानी उन सभी के लिए चेतावनी है जो अवैध तरीके से विदेश जाने का सपना देखते हैं। बिना वैध प्रक्रिया के विदेश जाना न सिर्फ अपराध है बल्कि जान के लिए खतरा भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गलत रास्ते से विदेश जाने के झांसे में न आएं और अपनी मेहनत और पैसा बर्बाद न करें।






