रिहाई के 44 दिन बाद अखिलेश से मिलने लखनऊ आए आजम खान, बेटा अब्दुल्ला भी रहा मौजूद

23 महीने बाद आज़म खां 23 सितंबर को सीतापुर जेल से बाहर आए थे। रिहाई के बाद अखिलेश यादव उनसे रामपुर में बंद कमरे में मिले थे, लेकिन तब आज़म खां ने चुप्पी साध ली थी। अब 44 दिन बाद लखनऊ में दोनों नेताओं की यह मुलाकात हुई।

मीडिया से बातचीत में आज़म खां ने कहा, “हमारी मुलाकात का मकसद यह दिखाना था कि इतनी बड़ी नाइंसाफी झेलने के बाद भी कुछ लोग हैं जो पत्थर और पहाड़ से भी ज़्यादा सब्र रखते हैं। मैं यहां अपने और अपने परिवार पर हुए अन्याय की कहानी लेकर आया हूं। हमारे कई साथी अभी भी जेलों में बंद हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जब भी वे मिलते हैं, उन दर्दभरे लम्हों को याद करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां जानें कि किसी के साथ ऐसा भी हुआ था। मुलाकात के बाद आज़म खां ने बताया कि उन्होंने अखिलेश यादव से कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। आजम ने यह भी कहा कि “जो मेरे साथ हुआ, उससे शायद मीडिया में बनी मेरी छवि अब कुछ बदली है और लोग मुझे बेहतर समझ पा रहे हैं।”
वहीं अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “न जाने कितनी यादें संग ले आए, जब वो आज हमारे घर आए! यह मेल-मिलाप ही हमारी साझा विरासत है।”
लखनऊ पहुंचने पर आज़म खां ने सपा के कई अन्य नेताओं से भी मुलाकात की। एक होटल में ठहरने के दौरान उन्होंने कहा, “50 साल की सियासत के बावजूद लखनऊ में मेरी कोई कोठी नहीं है, रामपुर में जहां रहता हूं, वहां बारिश में पानी भर जाता है।” फिर भी मुझे भूमाफिया कहा जा रहा है।” प्रधानमंत्री के ‘कट्टा’ बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “हमारे यहां तो कट्टा बेचने वाले का बेटा विधायक बना और उसे कमांडो सुरक्षा मिली हुई है।” उन्होंने व्यंग्य में कहा, “उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बहुत बेहतर है, सवाल मत पूछिए।” बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए बोले, “बिहार में आज भी जंगलराज है, इसलिए मैं वहां चुनाव प्रचार के लिए नहीं गया। जिनके पास हथियार हैं, वही वहां जा रहे हैं।”
लखनऊ प्रवास के दौरान उन्होंने लेखक हैदर अब्बास की किताब ‘सीतापुर की जेल डायरी’ का विमोचन भी किया।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading