पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (सीडीएफ) बनाने के लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है। यह प्रस्ताव 27वें संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश की रक्षा व्यवस्था और सैन्य कमान संरचना को आधुनिक बनाना है।
भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सबक लेते हुए पाकिस्तान सरकार सेना की कमान को और सशक्त करने की दिशा में यह संवैधानिक बदलाव करने जा रही है। इस संशोधन से असीम मुनीर की शक्तियां संविधान के तहत और अधिक बढ़ जाएंगी। प्रस्तावित संशोधन में अनुच्छेद 243 में बदलाव किया गया है, जो सशस्त्र बलों से संबंधित है। सरकार ने यह विधेयक संसद में पेश कर दिया है।
कानून मंत्री ने किया पेश
कानून मंत्री आजम नजीर तारड़ ने यह विधेयक संसद के उच्च सदन सीनेट में पेश किया। उन्होंने बताया कि इसमें कुल 49 धाराएं शामिल हैं, जो पाँच प्रमुख मुद्दों से जुड़ी हैं। सीनेट के अध्यक्ष यूसुफ रजा गिलानी ने विधेयक को कानून और न्याय समितियों के पास समीक्षा के लिए भेज दिया।
भारत के मॉडल की नकल
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान का यह ‘सीडीएफ’ मॉडल भारत के ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ (सीडीएस) प्रणाली से प्रेरित है। संशोधन के तहत प्रस्ताव है कि सेना प्रमुख को अब ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ की अतिरिक्त उपाधि मिलेगी, जिससे तीनों सेनाओं का सर्वोच्च नियंत्रण एक ही पद पर केंद्रित हो जाएगा।
अन्य प्रस्तावित बदलाव
संशोधन में फील्ड मार्शल की पदवी को आजीवन बनाए रखने का भी प्रस्ताव है। यानी फील्ड मार्शल जीवनभर अपनी वर्दी धारण कर सकेगा और उसे केवल महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से ही पद से हटाया जा सकेगा। सरकार उसके अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करेगी और उसे कानूनी संरक्षण भी प्राप्त रहेगा।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता अली जफर ने इस पर कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि विपक्ष को विधेयक का मसौदा उसी दिन मिला, जिससे उसे पढ़ने या समझने का समय नहीं मिला। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस संशोधन को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है।




