14 नवम्बर वर्ल्ड डायबिटीज डे:

बच्चों और युवाओं में तेज़ी से बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामले, पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में खतरा ज्यादा

आजकल युवाओं में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर महिलाओं में इसका खतरा अधिक देखा जा रहा है। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज भी महिलाओं में इस जोखिम को और बढ़ाती है। स्वस्थ दिनचर्या, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाकर डायबिटीज से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी है।
बीते कुछ वर्षों में यह बीमारी युवाओं में जिस रफ्तार से बढ़ी है, वह चिंताजनक है। जो डायबिटीज कभी 60-65 वर्ष की उम्र में देखी जाती थी, वह अब 20 से 22 वर्ष के युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑफिस का तनाव, लंबा स्क्रीन टाइम, जंक फूड का अधिक सेवन और बिगड़ती दिनचर्या इसके बड़े कारण हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक डायबिटीज की चपेट में आ रही हैं। इस वर्ष अप्रैल से अब तक हुई 1.52 लाख से ज्यादा लोगों की जांच में 29,576 मामलों में डायबिटीज की पुष्टि हुई। इनमें 16,385 महिलाएं और 14,191 पुरुष मरीज पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमण और बढ़ते प्रदूषण ने भी इस बीमारी को और बढ़ावा दिया है। कोविड के दौरान बढ़ी शरीर की सूजन और स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल से भी डायबिटीज के मामले बढ़े हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम2.5 और एनओ2 जैसे प्रदूषक इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। बच्चों में बढ़ते मोटापे, गलत खानपान, तनाव और व्यायाम की कमी के कारण भी डायबिटीज तेजी से पैर पसार रही है। महिलाओं में यह समस्या प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को प्रभावित कर सकती है। पीसीओएस, हार्मोनल असंतुलन बढ़ता है, जबकि पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है। गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर बच्चे का वजन भी अधिक हो सकता है। टाइप-2 डायबिटीज को संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से काफी हद तक घटाया जा सकता है।
बच्चों में मधुमेह के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। एम्स भोपाल में हर दिन पहुंचने वाले बाल मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थिति की गंभीरता देखते हुए एम्स भोपाल को पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी कोर्स शुरू करना पड़ा है। पिछले चार-पांच वर्षों में बच्चों में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़े हैं। टाइप-1 एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जबकि टाइप-2 मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी होती है। मैदान में खेलने की बजाय मोबाइल और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों में इस बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है। स्क्रीन टाइम घटाकर और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाकर स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
बदलती जीवनशैली भी एक बड़ा कारण है। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फूड और निष्क्रिय दिनचर्या इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाते हैं, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी ओर, सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं की कमी और एचबीए1सी जैसी जांचों में लंबा इंतजार भी समस्या को बढ़ाता है। जागरूकता की कमी स्थिति को और गंभीर बनाती है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading