दिल्ली ब्लास्ट: पिछले एक साल से रची जा रही थी फिदायीन हमले की साज़िश

दिल्ली धमाके की जांच के दौरान डॉक्टर उमर से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार, उमर पिछले साल से ही एक आत्मघाती हमलावर की तलाश में जुटा हुआ था। अप्रैल में हुई साजिश उस समय नाकाम हो गई जब उसके साथी दानिश ने यह कहते हुए पीछे हटने का निर्णय लिया कि इस्लाम में खुदकुशी हराम है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में जिस सफेदपोश डॉक्टरों से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है, वह पिछले वर्ष से लगातार आत्मघाती हमलावर की खोज में था। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर नबी इस पूरे षड्यंत्र को आगे बढ़ा रहा था। दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड से पकड़े गए आरोपी जसीर उर्फ दानिश से पूछताछ में बताया गया कि डॉ. उमर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था और बार-बार इस बात पर जोर देता था कि मिशन को पूरा करने के लिए आत्मघाती हमलावर अनिवार्य है।

बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले युवकों को बना रहे हैं आतंकी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन अब अपनी रणनीति बदल चुके हैं। वे अब उन युवाओं को निशाना बना रहे हैं जिनका न तो आपराधिक रिकॉर्ड है और न ही किसी अलगाववादी गतिविधि से संबंध। यह पहले की रणनीति से बिल्कुल अलग है, जिसमें पहले से आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को ही प्राथमिकता दी जाती थी। जांच कर रहे अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए डॉक्टर अदील, उसके भाई डॉ. मुजफ्फर राथर और डॉ. मुजम्मिल गनई के खिलाफ भी कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। इनके परिवारों का भी किसी आतंकी या अलगाववादी संगठन से कोई संबंध नहीं रहा। यहां तक कि डॉ. उमर का भी कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, यह आतंकी संगठनों की सोची-समझी रणनीति है ताकि उच्च शिक्षित और ‘क्लीन रिकॉर्ड’ वाले युवाओं को आसानी से आतंकी गतिविधियों में शामिल किया जा सके और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।

विदेशी फंडिंग जुटाने में सक्रिय थे शाहीन और डॉ. परवेज
जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल में शामिल डॉ. शाहीन ने कई देशों से फंडिंग एकत्रित की। जैश के निर्देश पर वह विदेशों में रहने वाले कश्मीरी मूल के डॉक्टरों से संपर्क करती थी। इसमें उसका भाई डॉ. परवेज भी मदद करता था। जांच से पता चला है कि दोनों पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों में रहने वाले डॉक्टरों से भी जुड़े थे। एजेंसियों के पास शाहीन द्वारा 30 लाख रुपये से अधिक की फंडिंग जुटाने के पुख्ता सबूत हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इस मॉड्यूल से जुड़े कई डॉक्टर कश्मीर मूल के थे, जिनके जरिये फंडिंग जुटाना जैश के लिए सुरक्षित माना जा रहा था। खुलासा यह भी हुआ कि डॉ. शाहीन और मुजम्मिल के नेटवर्क से जुड़े कई लोग व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स में सक्रिय थे, लेकिन 9 नवंबर को हुई गिरफ्तारियों के बाद कई सदस्य समूह छोड़कर गायब हो गए।

कॉलोनी में छानबीन तेज, गली सील
शहर में आतंकी उमर की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी। उमर पिछले दस दिनों तक हिदायत कॉलोनी के जिस मकान में ठहरा था, रविवार सुबह पुलिस ने उस गली को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया और वहां रहने वाले सभी लोगों का सत्यापन किया। नूंह के एसपी राजेश कुमार ने भी उस मकान का निरीक्षण किया। मकान उपलब्ध कराने में शामिल शोएब और रिजवान को पुलिस ने हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि शोएब उस महिला का रिश्तेदार है, जिसके घर उमर किराए पर रहा था।

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