
दिल्ली के लाल किले के पास बम धमाके की साजिश डॉ. उमर ने पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर कई दिन पहले ही तैयार कर ली थी। सूत्रों के मुताबिक, 30 अक्तूबर को यूनिवर्सिटी से फरार होने से पहले उसने अपने कमरे में एक वीडियो रिकॉर्ड किया था।
राजधानी में 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट के मास्टरमाइंड आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद को लेकर दो बड़े खुलासे सामने आए हैं। वहीं, दिल्ली धमाके के आरोपी उमर नबी को नूंह की हिदायत कॉलोनी में कमरा उपलब्ध कराने के शक में एक महिला को भी जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। एजेंसियां कई दिनों से नूंह में जांच कर रही थीं। हालांकि अधिकारी अब तक महिला की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहे।सूत्रों के अनुसार, करीब 35 वर्ष की इस महिला को बीती रात एनआईए टीम ने पकड़ा। उसका निकाह राजस्थान में हुआ था। पुलिस ने हिदायत कॉलोनी से बैरिकेड्स भी हटा दिए हैं।
लाल किले के पास धमाके की योजना उसने काफी पहले पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर बना ली थी। 30 अक्तूबर को यूनिवर्सिटी छोड़ने से पहले रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ। वीडियो में उसकी अंग्रेज़ी बोलने की क्षमता काफी बेहतर दिख रही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो में उसकी आवाज़ और बातों से साफ़ पता चलता है कि जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर ने उसे पूरी तरह कट्टरपंथी और आत्मघाती मिशन के लिए तैयार कर दिया था। वीडियो में उसके चेहरे पर किसी तरह की घबराहट नहीं दिखती। साथी डॉक्टरों के मुताबिक, वर्ष 2023 में डॉ. उमर करीब छह महीने तक अस्पताल से गायब रहा। किसी को नहीं पता था कि वह कहां गया। यूनिवर्सिटी ने भी उसे नौकरी से नहीं हटाया। छह महीने बाद वह सामान्य रूप से वापस आकर ड्यूटी करने लगा। सीनियर डॉक्टर भी उसके आने-जाने से अनजान थे।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन की छूट पर सवाल
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से कोई संबंध न होने के दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि उमर को यहां लगातार विशेष छूट मिलती रही। दो डॉक्टरों के अनुसार, वह शुरू से ही कम क्लास लेता था, सप्ताह में सिर्फ एक-दो लेक्चर, वह भी 15–20 मिनट के। उसकी ड्यूटी हमेशा शाम या नाइट शिफ्ट में लगाई जाती। कई बार मरीज आने पर उसे फ़ोन करके बुलाना पड़ता था। कुछ देर रुककर वह फिर अपने कमरे में चला जाता था। एनआईए ने उमर के साथी आमिर राशिद अली को भी गिरफ्तार किया है। सरकारी वकील के मुताबिक, आमिर के चेहरे पर न कोई पछतावा है, न घबराहट। उसने बताया कि धमाके में इस्तेमाल कार उसी के नाम पर रजिस्टर्ड है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बढ़ी दहशत
एनआईए और अन्य एजेंसियों की लगातार जांच से यूनिवर्सिटी में तनाव का माहौल है। कई कर्मचारी अपना सामान लेकर छुट्टी पर घर जाते नजर आए। अल-फलाह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का नाम मामले से जुड़ने के बाद मरीजों की संख्या आधी रह गई है। पहले जहां 200 मरीज आते थे, अब 100 से भी कम पहुंच रहे हैं। भर्ती मरीजों की संख्या भी काफी घट गई है। धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बाहर मंगलवार को भी सन्नाटा रहा, लेकिन सुरक्षा में थोड़ी ढील दिखाई दी। कुछ विशेष वाहनों की ही जांच हुई। छात्र सुबह से ही अपने घर लौटते दिखाई दिए। सुबह 9 बजे ईडी की टीम भी परिसर पहुंची। पिछले दिनों की तुलना में छात्रों और स्थानीय लोगों में अब कुछ सहजता लौटती दिख रही है।





