पिछले कुछ हफ्तों में मुंबई के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ श्रेणी तक दर्ज किया गया है। दिल्ली की तरह ही, मुंबई में भी लोग आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और गले में खराश की शिकायत कर रहे हैं। बढ़ते वायु प्रदूषण ने देश की वित्तीय राजधानी की स्थिति चिंताजनक बना दी है। सरकार ने हालात को देखते हुए मुंबई के कई हिस्सों में GRAP-4 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके साथ ही मुंबई भी उन शहरों की सूची में शामिल हो गया है, जहां वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। मझगांव, देवनार, मलाड, बोरीवली ईस्ट, चकाला अंधेरी ईस्ट, नेवी नगर, पवई और मुलुंड जैसे इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है।
प्रदूषण वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर रोक
बीएमसी ने इन प्रभावित इलाकों में सभी तरह के निर्माण कार्यों और धूल पैदा करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। विभिन्न निर्माण स्थलों की कड़ी निगरानी की जा रही है और 50 से अधिक साइटों को काम रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं। बेकरी, मार्बल कटिंग यूनिट्स जैसे छोटे उद्योगों को भी स्वच्छ प्रक्रियाएं अपनाने या कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। बीएमसी ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने और उत्सर्जन पर नजर रखने के लिए हर वार्ड में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। इन टीमों में इंजीनियर, पुलिसकर्मी और GPS-युक्त वाहन शामिल हैं, जो प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए GRAP
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) तैयार किया गया है, जिसमें चार चरण हैं। हर चरण में प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग सख्ती लागू की जाती है। GRAP-4 लागू होने पर सभी निर्माण कार्य बंद कर दिए जाते हैं, 10वीं और 12वीं को छोड़कर बाकी स्कूल बंद हो जाते हैं, सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया जाता है और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी जाती है। पिछले दिनों कई सेलिब्रिटी भी मुंबई की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रहे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट की चिंता
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बीते सप्ताह कोर्ट ने पांच सदस्यीय टीम गठित करने का निर्देश दिया है, जो चुने हुए इलाकों में जाकर निर्माण स्थलों की जांच करेगी और यह देखेगी कि बीएमसी के दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। कोर्ट ने दस दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह समिति बीएमसी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य स्वास्थ्य विभाग और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर बनेगी, और यही टीम तय करेगी कि किन क्षेत्रों में जांच की आवश्यकता है।






